ओडिशा में धान पर झुलसा, ब्लास्ट और तना छेदक का हमला, कृषि मौसम विभाग ने बताई दवा की मात्रा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 26 सितंबर 2026, भुवनेश्वर (ओडिशा): ओडिशा में धान पर झुलसा, ब्लास्ट और तना छेदक का हमला, कृषि मौसम विभाग ने बताई दवा की मात्रा – ओडिशा में बीते दिनों हुई लगातार बारिश और बढ़ी नमी के चलते धान की फसल पर कई रोग और कीट एक साथ हमला कर रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के भुवनेश्वर मौसम केंद्र की कृषि मौसम परामर्श सेवा ने 22 सितंबर को जारी अपने बुलेटिन संख्या 76/2026 में किसानों को धान पर शीथ रॉट, शीथ ब्लाइट, ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा (बीएलबी) के साथ-साथ लीफ फोल्डर, तना छेदक, भूरा फुदका (बीपीएच) और गॉल मिज कीट को लेकर सतर्क किया है। यह सलाह 19 से 23 सितंबर तक के लिए वैध बताई गई है।

यह समस्या राज्य के कई कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक साथ देखी जा रही है, जिनमें केंद्रापाड़ा, जगतसिंहपुर, खोरधा, पुरी, नयागढ़ (पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी तटीय मैदान), बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर (उत्तर-पूर्वी तटीय मैदान), गंजाम पट्टी (पश्चिमी मध्य पठार), केंदुझर (उत्तर मध्य पठार) और रायगड़ा-गजपति (पूर्वी घाट पहाड़ी क्षेत्र) शामिल हैं। धान की फसल इस समय कल्ले फूटने से लेकर बाली निकलने की अवस्था में है, जो इन रोग-कीटों के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती है।

लगातार बादल छाए रहने और नमी बने रहने की स्थिति में फफूंद जनित रोग बहुत तेजी से फैलते हैं, इसलिए बुलेटिन में किसानों को खेत की रोजाना निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही कार्रवाई करने की सलाह दी गई है। देरी होने पर शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे रोग पूरे खेत में तेजी से फैलकर उपज को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट रोग के नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल 50% + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25% डब्ल्यूजी की 80 ग्राम प्रति एकड़ या प्रोपिकोनाजोल 25% ईसी की 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा का छिड़काव करने को कहा गया है। ब्लास्ट के लिए अलग से ट्राइसाइक्लाजोल की 0.8 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव की सलाह दी गई है। जीवाणु झुलसा रोग के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन की 1.5 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के साथ कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की 30 ग्राम मात्रा मिलाकर छिड़काव करने को कहा गया है।

कीटों के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड की 400 ग्राम प्रति एकड़, लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 4.9 सीएस की 300 मिलीलीटर प्रति एकड़ या फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजी की 50 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा से लीफ फोल्डर और तना छेदक पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह सलाह आईएमडी की भुवनेश्वर, रानीताल, चिपलिमा, केंदुझर, जी. उदयगिरि और सिमिलिगुड़ा स्थित कृषि मौसम इकाइयों (एएमएफयू) के जरिए राज्य के कृषि विश्वविद्यालय नेटवर्क के साथ मिलकर जारी की गई है।

बुलेटिन में यह भी सुझाव दिया गया है कि छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के ठंडे समय में करें, तेज धूप या तेज हवा के दौरान छिड़काव से बचें, और किसी भी रसायन का इस्तेमाल करते समय दस्ताने व मास्क जैसी सुरक्षा का ध्यान रखें। खेत में पानी का जमाव ज्यादा होने पर पहले हल्की निकासी की व्यवस्था करना भी रोगों को फैलने से रोकने में मददगार माना गया है।

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