बाढ़ से बर्बाद फसलों पर सरकार की राहत, 23 सितंबर से मिलेगा कृषि इनपुट अनुदान—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
4 Min Read

एग्रीवेट: बिहार में अगस्त के अंतिम सप्ताह में आई बाढ़ से फसल क्षति झेलने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने कृषि इनपुट अनुदान-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि घोषित कर दी है। प्रभावित किसान 23 सितंबर से 29 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ ले सकेंगे। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, अतिवृष्टि और विभिन्न नदियों के बांधों के फाटक खोले जाने के बाद जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि से कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा। प्रतिवेदित फसल क्षति के आधार पर राज्य के 18 जिलों के 84 प्रखंडों की 653 प्रभावित पंचायतों के किसानों को कृषि इनपुट अनुदान दिया जाएगा।

सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार वर्षाश्रित (असिंचित) फसल के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसल के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा शाश्वत/बहुवर्षीय फसल, जिसमें गन्ना भी शामिल है, के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। अनुदान अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक देय होगा।

न्यूनतम अनुदान की राशि असिंचित क्षेत्र के लिए 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये तथा शाश्वत/बहुवर्षीय फसल के लिए 2,500 रुपये निर्धारित है।

योजना का लाभ पंजीकृत रैयत एवं गैर-रैयत दोनों किसानों को मिलेगा। रैयत किसान या किसान परिवार के लिए अद्यतन LPC/लगान रसीद अथवा वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की LPC/लगान रसीद मान्य होगी।

वहीं, गैर-रैयत किसान परिवार के लिए वार्ड सदस्य, मुखिया या सरपंच तथा कृषि समन्वयक द्वारा प्रमाणित स्वघोषित प्रमाण पत्र मान्य होगा। इसका प्रारूप DBT पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।

प्रभावित किसान बिहार कृषि विभाग के DBT Agriculture Portal पर अपनी 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या का उपयोग कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अनुदान की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

कृषि मंत्री ने किसानों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है। साथ ही किसानों को किसी अनधिकृत व्यक्ति या बिचौलिये की सहायता नहीं लेने की सलाह दी गई है। योजना से जुड़ी जानकारी के लिए किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-15551 अथवा संबंधित जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *