एग्रीवेट: Stubble Burning: पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित 2026 के नियमों को लेकर सवाल उठाए हैं. सोमवार को आम आदमी पार्टी ने दावा किया कि नए नियमों में पराली जलाने वाले किसानों पर जमीन के आकार के हिसाब से आर्थिक जुर्माना लगाने और राजस्व रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ करने का प्रावधान रखा गया है.
AAP नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि, पराली जलाने की समस्या का समाधान सिर्फ किसानों पर कार्रवाई करके नहीं किया जा सकता. इसके बजाय सरकार को पराली के इस्तेमाल के लिए बाजार तैयार करने, मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को आर्थिक फायदा देने पर ध्यान देना चाहिए.
AAP नेता के मुताबिक, पराली जलाने के प्रस्तावित नियमों में किसानों की जमीन के आकार के आधार पर अलग-अलग पर्यावरणीय मुआवजे की बात कही गई है. उनके अनुसार, दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों पर 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों पर 10,000 रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसानों पर 30,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित है. इसके साथ ही किसान के राजस्व रिकॉर्ड में 15 महीने के लिए ‘रेड एंट्री’ किए जाने का भी प्रावधान बताया गया है. पन्नू का दावा है कि कुछ मामलों में यह अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है.
पन्नू ने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री होने से किसानों के लिए कई तरह की दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं. उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में किसान अपनी जमीन पर लोन लेने या उसे बेचने में परेशानी का सामना कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि रेड एंट्री वाले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भी दिक्कत हो सकती है. इसी वजह से उन्होंने केंद्र से ऐसे नियमों पर दोबारा विचार करने और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए व्यावहारिक विकल्प देने की मांग की है.
बलतेज पन्नू ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े भी सामने रखे. उन्होंने दावा किया कि 2025 के धान कटाई सीजन में राज्य में खेतों में आग लगने की 5,114 घटनाएं दर्ज हुई थीं. उनके मुताबिक, यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 53 प्रतिशत और 2021 की तुलना में 93 प्रतिशत कम था. पन्नू ने कहा कि पंजाब के किसान अब पराली को खेत में जलाने के बजाय इसके वैज्ञानिक प्रबंधन की ओर बढ़ रहे हैं.
AAP नेता ने कहा कि पराली को सिर्फ खेतों की समस्या मानने के बजाय इससे कमाई का रास्ता भी बनाया जा सकता है. उनके अनुसार, अगर पराली खरीदने के लिए कंपनियों और उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों को फसल अवशेष बेचकर अतिरिक्त आमदनी हो सकती है. उन्होंने बायोमास बिजली और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में पराली के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात कही. उनका कहना है कि सरकार को किसानों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था भी तैयार करनी चाहिए, जिससे पराली उनके लिए आर्थिक रूप से उपयोगी बन सके.
पन्नू ने पराली जलाने की समस्या को पंजाब तक सीमित नहीं रखने की बात कही. उन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों में भी धान की कटाई के बाद पराली प्रबंधन की चुनौती रहती है. दरअसल, धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच किसानों के पास काफी कम समय होता है. खेत जल्दी तैयार करने के दबाव में कुछ किसान पराली जला देते हैं. इसी वजह से हर साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने और वायु प्रदूषण का मुद्दा फिर सामने आता है. ऐसे में पराली का बाजार, मशीनों की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाना इस समस्या के समाधान का एक रास्ता हो सकता है.