एग्रीवेट: हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर शहद उत्पादन किया जाता है और कांगड़ा, शिमला समेत अन्य जिलों में किसान मधुमक्खी पालन करते हैं. इस सीजन मधुमक्खी पालकों को बीटल कीट से भारी नुकसान हुआ है. किसानों को उत्पादन घटने की चिंता के साथ ही मधुमक्खी बॉक्स को नुकसान पहुंचा है. किसानों ने राज्य सरकार से नुकसान भरपाई की मांग की है. इसके बाद अब राज्य सरकार ने किसानों के नुकसान की भरपाई करने का का ऐलान किया है. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि प्रभावित किसानों को 30 फीसदी राहत राशि जारी की जाएगी. उन्होंने नुकसान आकलन रिपोर्ट मांगी है.
हिमाचल प्रदेश के शिमला, किन्नौर, कांगड़ा, चंबा, सोलन, और ऊना जिलों में मधुमक्खी पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है. यहां पर किसानों को मधुमक्खी पालन से मधुमक्खियां परागण (pollination) के जरिए सेब और अन्य फलों व फसलों की पैदावार को 20 से 25 फीसदी तक बढ़ाने में मदद करती हैं. राज्य में करीब 2,500 पंजीकृत (registered) व्यावसायिक मधुमक्खी पालक हैं. जबकि, बड़े पैमाने पर अनरजिस्टर्ड मधुमक्खी पालक भी हैं. किसानों ने सरकार को ज्ञापन भेजकर बताया है कि बीटल कीट से उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है.
किसानों ने अपने शिकायती पत्रों में बताया है कि छोटे छत्ते वाले बीटल (Small Hive Beetle) मधुमक्खी के छत्तों में घुसकर उनके अंडे, शहद, मोम और प्यूपा को खाकर पूरे छत्ते और मधुमक्खी कॉलोनी को गंभीर रूप से नष्ट कर रहे हैं. इससे शहद उत्पादन तो घटेगा ही उनके बॉक्स भी खराब हो रहे हैं. किसानों ने कहा कि राज्य में सालाना शहद उत्पादन लगभग 800 से 1,500 मीट्रिक टन शहद का किया जाता है. जो इस बार घट सकता है.
बागवानी विभाग के अनुमानों के अनुसार यह शहद उत्पादन क्षमता अनुकूल परिस्थितियों में 1600 मीट्रिक टन तक हो सकती है. लेकिन, अब कीट के प्रकोप के चलते उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई गई है. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिमला में बागवानी विभाग के अधिकरियों के साथ मधुमक्खी पालकों को हुए नुकसान को लेकर आयोजित बैठक की और नुकसान आकलन रिपोर्ट मांगी है. इसके साथ ही उत्पादन को बचाए रखने के लिए उपाय करने के निर्देश दिए हैं.
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिमला में बागवानी विभाग के अधिकरियों से कहा कि मधुमक्खी पालकों को हुए नुकसान की आकलन रिपोर्ट सौंपी जाए. उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले में बीटल के हमले से मधुमक्खी पालकों को हुए भारी नुकसान हुआ है और इसकी भरपाई के लिए 30 फीसदी तक राहत राशि पालकों को दी जाएगी. बागवानी मंत्री ने कहा कि कांगड़ा, बंड्डी, नागण, फट और कल्याड़ा क्षेत्र में बीटल के कारण मधुमक्खी पालकों को भारी नुकसान हुआ है.