एग्रीवेट: मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि विकास समेत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत 13 हजार करोड़ से ज्यादा राशि को मंजूरी दी है. इसके अलावा मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 3 सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी 4 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि को स्वीकृति दे दी है. इससे 88 हजार हेक्टेयर खेती को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा. इन परियोजनाओं में सूक्ष्म सिंचाई प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि विकास के तहत उत्पादन बढ़ोत्तरी के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत कर रही है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में 13 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि अलग-अलग योजनाओं पर खर्च के लिए मंजूर की गई है. खेतों में सिंचाई को प्राथमिकता देते हुए आगामी पांच वर्षों 2026-2031 के लिए नीमच की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृत दी गई. इसके साथ ही प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए 2800 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई.
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजगढ़ जिले के 40,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति के जरिए सिंचाई क्षमता में वृद्धि करना है. इससे जिले में बागवानी, औषधीय समेत अन्य फसलों के लिए सिंचाई संकट दूर होगा और मॉडर्न सिंचाई तकनीक का लाभ किसानों को मिल सकेगा.
नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आगामी 5 साल के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. जावद नीमच परियोजना एक दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई योजना है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा. परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत सिंचाई तकनीक (दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई) के माध्यम से पानी की बचत और सिंचाई क्षमता में बढ़ोत्तरी करते हुये क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना है.
राजगढ़ जिले की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर राजगढ़ जिले की 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता को बढ़ाना है. इस परियोजना के तहत बनने वाले बांध से कई नहरें भी निकलेंगी और पहले से मौजूद नहरों, जलस्रोतों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जो किसान सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे.