एग्रीवेट: Andhra Pradesh Shrimp Farming: आंध्र प्रदेश में झींगा पालन करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. एक तरफ झींगा उत्पादन में लगने वाला चारा, दवाएं और दूसरी जरूरी चीजें लगातार महंगी हो रही हैं, वहीं बाजार में झींगे के दाम नीचे आ गए हैं. इससे किसानों का मुनाफा घट रहा है और कई किसान आर्थिक दबाव में हैं. अब किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं. उनका कहना है कि अगर सितंबर के आखिर तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे अगले साल अप्रैल से जून तक तीन महीने झींगा पालन बंद कर देंगे. किसानों ने इसे ‘क्रॉप हॉलिडे’ यानी खेती से ब्रेक का नाम दिया है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश राज्य एक्वा किसान संघ ने 7 सितंबर को अलग-अलग जिलों के किसानों के साथ बैठक की. बैठक में उत्पादन लागत और बाजार भाव को लेकर चर्चा हुई. संघ के अध्यक्ष जी. गांधी भगवान राजू के मुताबिक, किसानों पर चारा, दवाओं और दूसरी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों का बोझ बढ़ रहा है. किसानों का यह भी कहना है कि खराब क्वालिटी के झींगा बीज से उत्पादन पर असर पड़ता है और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में कम बाजार भाव मिलने से किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. किसानों ने सरकार से झींगे के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है. इसके साथ ही उत्पादन लागत कम करने के लिए सरकार से दखल देने और चारा बनाने वाली कंपनियों से कीमतों में कमी करने की मांग की गई है.
किसान संघ ने साफ कहा है कि अगर सितंबर के अंत तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो अप्रैल से जून 2027 के बीच तीन महीने झींगा पालन से दूर रहने का फैसला किया जा सकता है. किसानों का मानना है कि उत्पादन लागत और बाजार कीमत के बीच बढ़ता अंतर लंबे समय तक खेती जारी रखना मुश्किल बना रहा है. क्रॉप हॉलिडे के जरिए किसान उत्पादन कम करके बाजार और सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना चाहते हैं.
इसी बीच झींगा किसानों के लिए चारे की कीमत को लेकर अदालत से भी अहम खबर सामने आई है. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 8 सितंबर को झींगा चारे की बढ़ी कीमतों पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने प्रॉन फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और संबंधित कंपनियों को अगले आदेश तक 12 जून के सर्कुलर में तय कीमतों पर ही चारा बेचने का निर्देश दिया है. मामला वन्नामेई और ब्लैक टाइगर झींगा के चारे की कीमतों में बढ़ोतरी से जुड़ा है. याचिका में चारे की कीमत में प्रति मीट्रिक टन 9,000 रुपये और 12,000 रुपये तक की बढ़ोतरी को चुनौती दी गई थी. अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.
आंध्र प्रदेश देश के एक्वाकल्चर कारोबार में सबसे अहम राज्यों में शामिल है. देश में खेती के जरिए पैदा होने वाले झींगे का करीब 70 से 80 फीसदी उत्पादन राज्य से होने का अनुमान है. यहां किसान मुख्य रूप से पैसिफिक व्हाइट श्रिम्प यानी लिटोपेनियस वैनमेई का पालन करते हैं. राज्य के कुल झींगा उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा बताई जाती है. कृष्णा-गोदावरी डेल्टा में झींगा पालन बड़े स्तर पर होता है. पश्चिम गोदावरी, कृष्णा, गुंटूर, प्रकाशम और नेल्लोर इसके प्रमुख क्षेत्र हैं. इन इलाकों में अनुकूल परिस्थितियों के कारण किसान साल में दो से तीन बार झींगे की फसल लेते हैं.
झींगा पालन में चारे और बीज की क्वालिटी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. इसके अलावा गर्मियों में तालाब के पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए एरेशन की जरूरत बढ़ जाती है. इससे बिजली और दूसरी लागत भी बढ़ती है. अधिकांश झींगे प्रोसेसिंग के बाद विदेश भेजे जाते हैं. अमेरिका आंध्र प्रदेश से होने वाले झींगा निर्यात के प्रमुख बाजारों में शामिल है. ऐसे में घरेलू लागत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में बदलाव भी किसानों की कमाई पर असर डाल सकता है.