एग्रीवेट: Bihar Paddy Procurement 2026: बिहार सरकार ने चालू खरीफ सीजन में धान खरीद और उसकी मिलिंग को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. इस बार सरकार का जोर राज्य के हर जिले में ज्यादा से ज्यादा उसना चावल तैयार करने पर है. इसके लिए चावल मिलों की व्यवस्था को पहले से दुरुस्त किया जा रहा है. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी चावल मिल संचालकों से कहा है कि वे धान खरीद शुरू होने से पहले अपनी तैयारी पूरी कर लें और तय समय के अंदर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूर करा लें. धान खरीद प्रक्रिया में शामिल होने वाली चावल मिलों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है. यह प्रक्रिया 16 अगस्त 2026 से बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के पोर्टल पर चल रही है. मिल संचालकों के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर 2026 रखी गई है. सरकार ने मिल मालिकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें. समय पर रजिस्ट्रेशन होने से धान की खरीद के बाद उसकी मिलिंग और चावल तैयार करने की प्रक्रिया को बिना रुकावट आगे बढ़ाया जा सकेगा. इस बार धान की कुटाई करने वाली मिलों की निगरानी के लिए बिजली की खपत को भी आधार बनाया जाएगा. बिहार सरकार ने मिलों में चालू बिजली कनेक्शन होना जरूरी कर दिया है. मिल में हर महीने कितनी बिजली इस्तेमाल हो रही है, इसकी जानकारी बिजली वितरण कंपनियों के जरिए सरकार तक पहुंचेगी. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मिल में काम किस स्तर पर हो रहा है. बिजली की खपत पर नजर रखने से मिलिंग की प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना को कम करने में भी मदद मिलेगी. धान और तैयार चावल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए भी इस बार निगरानी व्यवस्था सख्त रहेगी. सरकार ने पिछले साल की तरह इस साल भी परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और सत्यापन जरूरी किया है. सबसे अहम बात यह है कि धान और चावल की ढुलाई सिर्फ GPS लगे वाहनों से ही की जाएगी. इससे वाहन कहां से चला, किस रास्ते से गया और किस जगह पहुंचा, इसकी जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकेगी. परिवहन व्यवस्था को और पुख्ता बनाने के लिए वाहनों के दस्तावेजों की जांच ‘वाहन सारथी पोर्टल’ के जरिए की जाएगी. वहीं, चावल मिलों के परिसर को जियो फेंसिंग से जोड़ा जाएगा. बिहार राज्य खाद्य निगम के व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम यानी VTS के जरिए वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी. इसका मकसद धान और चावल की ढुलाई के दौरान होने वाली गड़बड़ी को रोकना और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना है. सरकार का कहना है कि धान खरीद की पूरी प्रक्रिया को किसानों के लिए आसान और साफ-सुथरा बनाने की कोशिश की जा रही है. खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से खरीद, मिलिंग और परिवहन की निगरानी बेहतर होगी. बिजली खपत की जानकारी, GPS ट्रैकिंग, जियो फेंसिंग और ऑनलाइन सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को इसी मकसद से जोड़ा गया है. इससे धान खरीद के बाद मिलिंग और चावल की ढुलाई तक हर चरण पर नजर रखना आसान होगा. सरकार ने सभी चावल मिल संचालकों से कहा है कि वे 15 अक्टूबर तक अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें. साथ ही मिल में जरूरी व्यवस्था और चालू बिजली कनेक्शन भी सुनिश्चित करें. खरीफ सीजन में धान खरीद शुरू होने से पहले इन तैयारियों का पूरा होना जरूरी है, ताकि किसानों से खरीदे गए धान की मिलिंग समय पर हो सके और राज्य में उसना चावल तैयार करने का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा सके.