एग्रीवेट: हरियाणा के कुछ हिस्सों में धान की कटाई शुरू हो गई है. राज्य में धान की सरकारी खरीद इस महीने के अंत तक शुरू होने की संभावना है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने फसल अवशेष यानी पराली के प्रबंधन को लेकर सख्त तैयारी शुरू कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सीजन में धान की कटाई के बाद करीब 80 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष निकलने का अनुमान है. सरकार का लक्ष्य है कि इस अवशेष का उचित तरीके से प्रबंधन किया जाए और किसान इसे खेतों में जलाने से बचें. कृषि विभाग ने इस सीजन के लिए 8,200 से ज्यादा जिला स्तर के नोडल अधिकारियों की पहचान की है. इन अधिकारियों की जिम्मेदारी राज्य के 22 जिलों में करीब 6.19 लाख किसानों तक पहुंचने की होगी. सोमवार तक अलग-अलग विभागों के 7,519 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है. ये अधिकारी करीब 5.58 लाख किसानों और 5,600 गांवों को कवर कर रहे हैं. अधिकारियों का काम किसानों को पराली प्रबंधन के तरीके बताना और फसल अवशेष जलाने से रोकने में मदद करना होगा. आंकड़ों के मुताबिक, इन गांवों में बासमती और गैर-बासमती धान के लिए कुल 34.02 लाख एकड़ क्षेत्र दर्ज किया गया है. इसमें सबसे ज्यादा 3.83 लाख एकड़ क्षेत्र करनाल में है. इसके बाद कैथल, सिरसा और फतेहाबाद का स्थान है. यमुनानगर में राज्य के सबसे ज्यादा 648 गांवों में धान की खेती हुई है. इन गांवों में करीब 2.06 लाख एकड़ जमीन पर धान बोया गया है. यहां 734 नोडल अधिकारियों की जरूरत है, जबकि अब तक 646 अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है. कुरुक्षेत्र के कृषि उपनिदेशक (DDA) गिरीश नागपाल ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि जिले में करीब 580 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. एक अधिकारी को कम से कम 100 किसानों की जिम्मेदारी दी गई है. ये अधिकारी किसानों से संपर्क कर फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूक करेंगे. इसी बीच कुरुक्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है. नोडल अधिकारी किसानों को पराली जलाने पर होने वाली कार्रवाई और इसके नुकसान के बारे में जानकारी देंगे. साथ ही, वे कृषि विभाग के साथ समन्वय कर किसानों के लिए जरूरी मशीनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेंगे. कुरुक्षेत्र के कृषि उपनिदेशक गिरीश नागपाल ने कहा कि धान की कटाई अभी शुरुआती चरण में है. फिलहाल शाहाबाद के कुछ इलाकों में ही कटाई शुरू हुई है. किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पैडी स्ट्रॉ चॉपर, सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों के इस्तेमाल के बारे में भी बताया जा रहा है. नागपाल ने कहा कि विभाग ने जिले में 4 जागरूकता-सह-प्रवर्तन वैन भी तैनात की हैं. ये वैन जिले के अलग-अलग इलाकों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रही हैं और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद कर रही हैं.