एग्रीवेट: प्रधानमंत्री Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था. एक साधारण परिवार से निकलकर देश के प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले पीएम नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में ग्रामीण भारत और महिलाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं. उनके कार्यकाल में महिलाओं को सिर्फ सरकारी मदद पाने वाली लाभार्थी बनाने के बजाय उनके लिए कमाई, खेती और कारोबार से जोड़ने वाली कई योजनाएं शुरू की गईं. खासकर ग्रामीण महिलाओं और महिला किसानों के लिए लखपति दीदी, नमो ड्रोन दीदी, कृषि सखी जैसी पहलों के जरिए आर्थिक मदद, ट्रेनिंग और नई तकनीक तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है. ऐसे में पीएम मोदी के जन्मदिन पर जानते हैं कि इन पहलों के जरिए महिला किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए क्या-क्या बदलाव किए गए हैं. लखपति दीदी पहल को 2023 में DAY-NRLM के तहत शुरू किया गया था. इसका लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ऐसी आजीविका से जोड़ना है, जिससे उनकी सालाना घरेलू आय कम से कम 1 लाख रुपये हो और यह कमाई टिकाऊ रहे. सरकार के मुताबिक, जुलाई 2026 तक 3.46 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी थीं. पहले 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे तय समय से पहले हासिल कर लिया गया. अब सरकार ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया है. इस पहल में खेती, पशुपालन, डेयरी, छोटे कारोबार और दूसरे ग्रामीण रोजगार के साधनों से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है. कृषि में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की गई. इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन दिए जाने हैं, जिनका इस्तेमाल खेतों में खाद और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाओं के लिए किया जा सकता है. इस योजना के लिए 1,261 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 15,000 ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को देने का लक्ष्य रखा गया है. चुने गए समूहों को ड्रोन पैकेज की लागत का 80 फीसदी तक, अधिकतम 8 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता मिल सकती है. साथ ही महिलाओं को ड्रोन चलाने और तकनीकी काम की ट्रेनिंग भी दी जाती है. यानी महिला समूह खुद ड्रोन सेवा देकर किसानों की मदद करने के साथ अपनी आमदनी का जरिया भी बना सकते हैं. कृषि सखी पहल के जरिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को कृषि से जुड़ी ट्रेनिंग देकर किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है. ये महिलाएं स्थानीय स्तर पर किसानों को खेती की तकनीक, सरकारी योजनाओं और दूसरी कृषि सेवाओं की जानकारी देने का काम करती हैं. पहले चरण में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश और मेघालय समेत 12 राज्यों में इसका प्रशिक्षण शुरू किया गया था. मार्च 2026 में कृषि बीमा कंपनी ने भी कृषि सखी पहल के जरिए महिला किसानों के बीच फसल बीमा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का कार्यक्रम शुरू किया. दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी DAY-NRLM ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार और छोटे कारोबार के अवसर देने वाली प्रमुख योजना है. जुलाई 2026 तक देश में करीब 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से 10.05 करोड़ ग्रामीण महिलाएं जुड़ी थीं. वहीं सितंबर 2026 तक सरकार के मुताबिक, महिला स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों के जरिए 13.67 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का संचयी ऋण दिया जा चुका था. इससे महिलाओं को खेती के साथ डेयरी, पशुपालन, छोटे कारोबार और दूसरे काम शुरू करने के लिए कर्ज तक पहुंच बनाने में मदद मिली है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी प्रधानमंत्री-KISAN के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद तीन किस्तों में दी जाती है. इसमें महिला किसान भी बड़ी संख्या में लाभार्थी हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी गई. इनमें 2.18 करोड़ से ज्यादा महिला किसान थीं. योजना शुरू होने के बाद से 4.46 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वितरित की जा चुकी थी.