स्रोत (Source): Kisan India
तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित दक्षिण जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस 2026 के उपलक्ष्य में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उन्होंने कहा कि किसान केवल देश के अन्नदाता नहीं हैं, बल्कि वे जीवनदाता भी हैं, उनकी सहायता के बिना समाज का संचालन संभव नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सभी आवश्यक सेवाओं तक उनकी पहुंच को सुलभ बनाने पर केंद्र सरकार के द्वारा पूरा काम किया जा रहा है।
कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री चौहान ने कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई विशेष प्रोत्साहन योजना के बाद से नारियल का निर्यात तेजी से बढ़कर 7 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
उन्होंने कृषि उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के बारे में भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि खेती के क्षेत्र में तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं: पहला देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, दूसरा किसानों की आजीविका को स्थायी बनाना और तीसरा पोषण युक्त आहार को समस्त जनता तक पहुंचाना। केंद्र सरकार इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्य सरकारों की पूरी सहायता करेगी।
यह दक्षिण जोनल कृषि सम्मेलन 2026 हैदराबाद के ट्राइडेंट होटल में आयोजित किया जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य किसानों की जिंदगी में सुधार लाना, देश की खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करना, कृषि के माध्यम से रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और खेती के जरिए राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देना है। कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री चौहान ने फिर से किसानों की महत्वता को बल दिया और कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं हैं, बल्कि वे जीवनदाता भी हैं, उनकी सहायता के बिना देश का कोई भी कार्य संचालित नहीं हो सकता।
मंत्री चौहान ने नारियल निर्यात में हुी विशेष वृद्धि को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में नारियल का निर्यात 4349 करोड़ रुपये से बढ़कर 7038 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें 62 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि नारियल प्रोत्साहन योजना के कारण किसानों को सीधा लाभ मिला है और नारियल उत्पादन में भी तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने अन्य फसलों के उत्पादन को भी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया और बताया कि दक्षिणी राज्यों में बागवानी फसलें इसके लिए सबसे उपयोगी हैं।
दक्षिणी राज्यों में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना करते हुए मंत्री चौहान ने राज्य सरकारों के इस प्रयास को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत सरकार राज्यों को इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर संभव सहयोग जारी रखेगी। उन्होंने फिर से खेती के उन तीनों मुख्य लक्ष्यों को दोहराया: पहला देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, दूसरा किसानों की आजीविका को स्थायी बनाना और तीसरा पोषण युक्त आहार को जनता तक पहुंचाना।
कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री चौहान ने नियमों के बारे में अपने विचार भी व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नियमें जनता के लिए बनाई जाती हैं, न कि जनता नियमों के लिए। उन्होंने पुराने नियमों और प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव के लिए राज्य सरकारों से सुझाव देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार का काम केवल फाइल में नहीं, बल्कि जनता की जिंदगी में दिखना चाहिए। इसलिए जहां भी नियमों में बदलाव की जरूरत है, लोग सुझाव दे सकते हैं। भारत सरकार भी इन सुझावों पर काम करेगी और जो काम राज्य सरकारों के दायरे में आता है, उन्हें निश्चित रूप से राज्य सरकारें करेंगी, ताकि जनता को अधिक राहत दी जा सके।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि देश को खेती के लिहाज से 5 अलग-अलग जोन में बांटा गया है। आज की सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसानी को और बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। जलवायु परिवर्तन के कारण खेती को गहरे नुकसान पहुंच रहे हैं, जो किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, इस पर विस्तृत मंथन और चिंतन जारी है।
वहीं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने भारत के कृषि विभाग की उपलब्धियों को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा किसी भी प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र पर इतना ध्यान नहीं दिया है। आज हर जोन के किसानों की मुसीबतों और मुश्किलों को समझने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं और इन्हें दूर करने के लिए नई-नई योजनाओं का निर्माण किया जा रहा है।