एग्रीवेट: हरियाणा में अक्टूबर के दौरान हुई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान के कारण गेहूं की बुवाई में देरी हो रही है. बारिश की वजह से खेतों में नमी ज्यादा है. ऐसे में किसान रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं. भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस क्षेत्र में गेहूं की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में शुरू हो जाती है. नवंबर के पहले सप्ताह तक करीब 10 फीसदी क्षेत्र में बुवाई पूरी हो जाती है. लेकिन इस बार किसान मिट्टी में अधिक नमी के चलते बुवाई करने से परहेज कर रहे हैं.
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक अनुज कुमार ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि बारिश के कारण पिछली फसलों की कटाई में काफी देरी हुई है. इसका असर गेहूं समेत अन्य रबी फसलों की बुवाई पर भी पड़ा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मौसम की स्थिति सुधरने पर दिवाली के बाद बुवाई में तेजी आ सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, हरियाणा में अक्टूबर के दौरान 34.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह इस महीने की सामान्य बारिश 9.4 मिलीमीटर से 268 फीसदी ज्यादा है. गेहूं उत्पादन वाले प्रमुख जिलों में भी सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई. सोनीपत में 85.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 12.1 मिलीमीटर के मुकाबले 605 फीसदी अधिक है.
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इसी तरह पानीपत में 79 मिलीमीटर, करनाल में 64 मिलीमीटर, कैथल में 49 मिलीमीटर, कुरुक्षेत्र में 58 मिलीमीटर और पलवल में 48 मिलीमीटर बारिश हुई. इन सभी जिलों में सामान्य से कम से कम 60 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई. भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के वैज्ञानिकों ने बताया कि क्षेत्र में गेहूं की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है. इसे देखते हुए संस्थान ने किसानों को बीज बांटना शुरू कर दिया है. साथ ही खेतों का निरीक्षण और फसलों में बीमारियों की पहचान का काम भी किया जा रहा है.
करनाल के कृषि उपनिदेशक जसविंदर सैनी के मुताबिक, जिले के कई इलाकों में खेतों में अभी भी ज्यादा नमी है. खासकर कुरुक्षेत्र से सटे नीलोखेड़ी और इंद्री क्षेत्रों में खेत गीले हैं. वहीं, असंध के कुछ हिस्सों में धान की कटाई अभी जारी है. उन्होंने बताया कि जिले में अब तक गेहूं की बुवाई 2 फीसदी से भी कम क्षेत्र में हुई है. पड़ोसी जिले कुरुक्षेत्र में किसानों ने आलू और दूसरी सब्जियों की बुवाई शुरू कर दी है. हालांकि, बेमौसम बारिश के कारण इन फसलों की बुवाई में भी देरी हुई है. वहीं, IIWBR ने 2026-27 सीजन के लिए अपनी पहली कृषि सलाह जारी की है. इसमें देशभर के किसानों को नवंबर के पहले दो हफ्तों में गेहूं और जौ की बुवाई करने की सलाह दी गई है.
गेहूं के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई के समय, अपने क्षेत्र की जलवायु और सिंचाई की सुविधा को ध्यान में रखकर गेहूं की किस्मों का चयन करें. साथ ही, अच्छी फसल और बेहतर पैदावार के लिए भरोसेमंद स्रोतों से प्रमाणित बीज खरीदें. इससे फसल का अंकुरण एक समान होगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. हरियाणा में किसान आमतौर पर जल्दी बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 370-372 और WH 1270 किस्मों को पसंद करते हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2026-27 सीजन के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 121 लाख मीट्रिक टन तय किया है. यह 2025-26 में हुए 120.7 लाख मीट्रिक टन उत्पादन से थोड़ा अधिक है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसकी वजह कमजोर मॉनसून और अल नीनो का संभावित असर है.