एग्रीवेट: खेती की लागत के बीच किसानों के लिए आर्थिक मदद की एक और राह खुलने जा रही है. पश्चिम बंगाल के किसानों को अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 6,000 रुपये के साथ राज्य सरकार की ओर से 3,000 रुपये सालाना अतिरिक्त मिल सकते हैं. यानी पात्र किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से मिलाकर सालभर में कुल 9,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पहली किस्त 5 नवंबर 2026 को जारी करने की तैयारी है. खास बात यह है कि किसानों को नए सिरे से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ सकती है. हालांकि, इसका लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी. ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि किसे पैसा मिलेगा, एक परिवार से कितने लोग लाभ उठा सकेंगे और किन गलतियों के कारण किस्त अटक सकती है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी पुरानी कृषक बंधु योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कर दिया है. राज्य मंत्रिमंडल ने अक्टूबर 2026 के आखिरी दिनों में इस बदलाव को मंजूरी दी. इस योजना का मकसद पीएम किसान के पात्र लाभार्थियों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता देना है. सरकार के कार्यक्रम के मुताबिक, पहली किस्त 5 नवंबर को हुगली जिले के पुरसुरा से जारी की जाएगी. अनुमान है कि राज्य के करीब 48 से 50 लाख किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकता है.
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इस योजना में किसानों को मिलने वाली कुल सहायता सबसे अहम है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में मिलते हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से 3,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार यह रकम 2,000 और 1,000 रुपये की दो किस्तों में देगी. इस तरह दोनों योजनाओं को मिलाकर किसानों को सालाना 9,000 रुपये तक मिल सकते हैं. यह राशि खेती से जुड़े छोटे-मोटे खर्चों को पूरा करने में मददगार हो सकती है.
योजना का फायदा पश्चिम बंगाल के उन किसानों को मिलने की संभावना है, जो पहले से पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थी हैं. कृषि मंत्री के बयान के मुताबिक, एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को इस योजना का लाभ मिलेगा. इसके लिए किसान के आधार, बैंक खाते और जमीन के रिकॉर्ड का सही होना जरूरी है. साथ ही पीएम किसान की e-KYC पूरी होनी चाहिए और लाभार्थी का स्टेटस सक्रिय होना चाहिए. आयकर देने वाले किसान, कुछ श्रेणियों के सरकारी कर्मचारी, अधिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी और डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, सीए तथा आर्किटेक्ट जैसे पेशेवर पीएम किसान के नियमों के तहत अपात्र हो सकते हैं. ऐसे में लाभार्थियों के रिकॉर्ड की जांच के बाद अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं.
किसानों को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. सरकार पीएम किसान के मौजूदा लाभार्थी रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान कर सकती है. फिर भी किसानों को आधार कार्ड, पीएम किसान पंजीकरण संख्या, बैंक पासबुक और जमीन के दस्तावेज तैयार रखने चाहिए. विरासत में मिली जमीन के मामले में म्यूटेशन या विरासत से जुड़े कागजात भी जरूरी हो सकते हैं. किसानों को पीएम किसान पोर्टल पर अपना स्टेटस और e-KYC जरूर जांचनी चाहिए. बैंक खाता आधार से लिंक और DBT के लिए सक्रिय होना चाहिए. किसी तरह की गड़बड़ी होने पर ब्लॉक कृषि अधिकारी से संपर्क करें. ध्यान रखें, योजना की अंतिम पात्रता और भुगतान संबंधी नियम राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होंगे. किसी एजेंट को पैसे न दें और OTP या बैंक की गोपनीय जानकारी साझा न करें.