एग्रीवेट: 26 अक्टूबर 2026, हरियाणा: पंजाब में पराली जलाने के 510 मामले, 9.30 लाख का जुर्माना; 166 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री – पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने के 510 मामले सामने आए हैं। इनमें से 467 स्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है। पराली जलाने वाले किसानों पर कुल 9.30 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से 4.93 लाख रुपए की वसूली भी की जा चुकी है।
प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। निगरानी में ढिलाई को लेकर 227 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, पराली जलाने के मामलों में अब तक चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 166 मामलों में संबंधित किसानों के भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की गई है।
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फिरोजपुर जिले में पराली जलाने के 23 मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। जिले में पराली जलाने के मामलों में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से सात मामले बुधवार को ही दर्ज किए गए।
एडीसी (डेवलपमेंट) कृष्णा पाल राजपूत ने बताया कि वह स्वयं और जिले के सभी एसडीएम लगातार फील्ड में जाकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। खेतों में आग लगने की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और आग बुझाने के प्रयास करते हैं। प्रशासन का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण करना और किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है।
पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ आसपास के क्षेत्रों में धुएं का असर भी देखने को मिलता है। इसे रोकने के लिए प्रशासन निरीक्षण, जुर्माना, एफआईआर और भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसे कदम उठा रहा है। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।
राज्य में दर्ज 510 मामलों के मुकाबले 467 स्थानों का निरीक्षण किया जाना निगरानी अभियान की प्रगति को दर्शाता है। हालांकि, शेष स्थानों के निरीक्षण और कार्रवाई की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन के सामने पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के साथ किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने की चुनौती है।