एग्रीवेट: 26 अक्टूबर 2026, भोपाल: नई मत्स्य नीति-2026 से दोगुना होगा मछली उत्पादन, मध्यप्रदेश बनेगा देश का अग्रणी केंद्र – मध्यप्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने और मछली पालन से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नई नीति से मत्स्य उत्पादकों, विक्रेताओं, परिवहनकर्ताओं और मछली पालन से जुड़े सभी लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रदेश की विशाल जलसंपदा को निवेश, नवाचार और निर्यात से जोड़कर मध्य प्रदेश को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित नेशनल फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में नई नीली क्रांति लाने के लिए सरकार तैयार है। प्रदेश में उपलब्ध विशाल जलराशि का बेहतर प्रबंधन करते हुए जलचरों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और यहां अनेक बड़ी जल संरचनाएं मौजूद हैं। प्रदेश के जल स्रोतों का उपयोग केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें बहुआयामी आय के स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा। एक ही जल स्रोत से लोगों को पेयजल, किसानों को सिंचाई के लिए पानी, पशुपालकों को पशुओं के लिए पानी और मत्स्यपालकों को मछली उत्पादन का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही जल पर्यटन को बढ़ावा देने और जलीय जीवों के संरक्षण में भी इन जल स्रोतों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का समुचित उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगा। इससे कृषि और मत्स्य पालन को एक-दूसरे से जोड़कर किसानों तथा मत्स्यपालकों की आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार किए जा सकेंगे।
नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ इससे जुड़े पूरे कारोबार को प्रोत्साहित करना है। मछली उत्पादन से लेकर उसकी बिक्री, परिवहन और निर्यात तक की गतिविधियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इससे मत्स्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जल संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनका बेहतर उपयोग किया जा सकता है। सरकार किसानों और मत्स्यपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन को व्यवस्थित और लाभकारी गतिविधि बनाने के साथ जल संपदा के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नेशनल फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में निवेश और निर्यात की संभावनाओं पर जोर दिया गया। प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधन, मछली उत्पादन की संभावनाएं और इससे जुड़े व्यवसायों को आगे बढ़ाने के लिए निवेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की मंशा है कि मध्य प्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी संभावनाओं का पूरा उपयोग करे और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत बनाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि और निवेश को प्रोत्साहन देने से प्रदेश में नई आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। नई नीति के माध्यम से मत्स्य पालकों, किसानों और इस व्यवसाय से जुड़े अन्य लोगों को लाभ पहुंचाने के साथ मध्यप्रदेश को मत्स्य उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।