गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना: मध्यप्रदेश में गायों के दूध उत्पादन की होगी प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे ₹1 लाख तक – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 25 अक्टूबर 2026, भोपाल: गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना: मध्यप्रदेश में गायों के दूध उत्पादन की होगी प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे ₹1 लाख तक – मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादक गायों की पहचान करने तथा पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना संचालित की जा रही है। योजना के माध्यम से उन्नत देशी नस्ल की गायों के पालन एवं संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ पशुपालकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाएगा।

योजना के तहत प्रथम वर्ष में प्रदेश की 208 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। द्वितीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक प्रदेश के 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित होगी। प्रतियोगिता में संबंधित वृंदावन ग्राम  के पशुपालकों की गायों को शामिल किया जाएगा।

योजना के तहत सभी वर्गों के पशुपालक पात्र होंगे। ऐसे पशुपालक जिनकी गाय प्रतिदिन 6 लीटर या उससे अधिक दूध देती है, वे प्रतियोगिता में सहभागिता कर सकेंगे। श्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक गाय के पशुपालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।

प्रतियोगिता के आयोजन के लिए विकासखंड स्तर पर समिति गठित की जाएगी। समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति प्रतिभागियों के आवेदन प्राप्त कर उनका संकलन एवं परीक्षण करेगी तथा प्रतियोगिता आयोजित करेगी। परिणामों को संकलित कर जिला उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी को भेजा जाएगा।

जिला स्तर पर गठित समिति में कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी, उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास तथा उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं शामिल होंगे। समिति द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार परीक्षण एवं सत्यापन के बाद पुरस्कार विजेताओं के नाम स्वीकृत किए जाएंगे। प्रत्येक वर्ष गोवर्धन पूजा दिवस पर विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

यदि प्रथम, द्वितीय या तृतीय स्थान के लिए दो दुधारू पशुओं का चयन होता है, तो तीनों समय के दुग्ध उत्पादन में कम अंतर वाले पशु को वरीयता दी जाएगी। इसके बाद कम ब्यात एवं कम उम्र के पशु को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बावजूद मूल्यांकन समान रहने पर समिति का निर्णय अंतिम होगा।

पुरस्कार में प्राप्त राशि का उपयोग शत-प्रतिशत वर्णित देशी गौवंश की खरीद, संरक्षण एवं संवर्धन में किया जा सकेगा। पुरस्कृत गौपालक को राशि के उपयोग का विवरण विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराना होगा। योजना से पशुपालकों को प्रोत्साहन मिलने के साथ देशी गाय की नस्लों को पहचान मिलेगी। इसके अलावा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ने, पशुपालकों की आय में वृद्धि होने तथा उच्च आनुवंशिक नस्ल के देशी गौवंश के पालन, संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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