एग्रीवेट: महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. 24 घंटे में दो किसानों ने जान दे दी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरद पवार के महाराष्ट्र से विधायक रोहित पवार ने दोनों की मौत पर राज्य सरकार को घेरा है. इसके बाद किसानों की मौतों को लेकर सियासी हंगामा शुरू हो गया है. रोहित पवार ने कहा कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां 8-10 हजार रुपये की वसूली के लिए किसानों को यातनाएं दे रही हैं. उन्होंने कहा कि नांदेड़ में फाइनेंस कंपनी के ऑफिस में किसान का शव फंदे से लटका पाया गया है. जबकि परभणी के किसान की भी मौत फाइनेंस कंपनी के कर्ज की वसूली से पेरशान होकर हुई है. उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि किसान बेहद गंभीर स्थिति में हैं.
महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक निजी फाइनेंस कंपनी के दफ्तर के अंदर 40 वर्षीय किसान का शव फंदे से लटका मिला. परिजनों का आरोप है कि 10,000 रुपये के कर्ज को लेकर उसे परेशान किया जा रहा था. मृतक चंद्रकांत शिंदे, जो मलकोउठा गांव के रहने वाले थे, के पास दो एकड़ कृषि भूमि थी. वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार किसान शिंदे के परिवार के अनुसार फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी बुधवार को 10,000 रुपये के कर्ज की वसूली के सिलसिले में उन्हें कंपनी के दफ्तर ले गए थे. अगले दिन वह दफ्तर के अंदर फंदे से लटके मिले.
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शिंदे के परिवार का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा और फिर उनकी मौत को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को फंदे से लटका दिया. सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया. इंस्पेक्टर अजीत कुंभार ने मीडिया को बताया कि वजीराबाद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक नीलाभ रोहन ने पत्रकारों को बताया कि शव का पोस्टमार्टम होने के बाद ही मौत के सही कारण का पता चल पाएगा.
किसानों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले करजत से विधायक रोहित पवार ने कहा कि महज 8-10 हजार रुपये के कर्ज की वसूली के लिए 40 वर्षीय किसान चंद्रकांत शिंदे को एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में बंद कर दिया गया, अमानवीय यातनाएं दी गईं और उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए एक झूठी कहानी गढ़ दी गई. यह घटना बेहद चौंकाने वाली और गुस्से से भर देने वाली है. राज्य के किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और सरकारी दमन के दोहरे संकट में फंसे हुए हैं, और अब इन मनमानी करने वाली फाइनेंस कंपनियों ने अपने अत्याचारपूर्ण वसूली के तरीकों और शोषण से सारी हदें पार कर दी हैं.
रोहित पवार ने कहा कि नांदेड़ के मलकाउथा में हुई घटना के बाद 24 घंटे भी नहीं बीते अब परभणी के मानवत तालुका में भी 32 वर्षीय किसान लहूजी लाड ने माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कर्ज से परेशान होकर अपनी जान दे दी है. किसान को कर्ज की छोटी रकम की किस्तों के लिए परेशान किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो किसान इसी तरह हर दिन आत्महत्या करते रहेंगे.
नांदेडच्या माळकौठ्यात अवघ्या ८-१० हजाराच्या कर्ज वसुलीसाठी एका ४० वर्षीय अल्पभूधारक शेतकरी चंद्रकांत दगडूजी शिंदे यांना खासगी फायनान्स कंपनीने आपल्या कार्यालयात डांबून आणि अनन्वित छळ करून त्याचा खून केला आणि ही आत्महत्या असल्याचा बनाव रचला. ही घटना अत्यंत संतापजनक आणि चीड आणणारी आहे. राज्यातील बळीराजा आधीच अस्मानी आणि सुलतानी अशा दुहेरी संकटात सापडला असताना या बेलगाम फायनान्स कंपन्यांच्या जुलमी वसुलीने आणि सावकारी छळाने परिसीमा ओलांडलीय. आम्ही सातत्याने सरकारला विनंती केलीय की, या कंपन्यांच्या मनमानीला आणि गुंडगिरीला आळा घाला, पण सरकारला केवळ भांडवलदारांचं हित पाहण्यातच इंटरेस्ट आहे. त्यामुळं या शेतकऱ्याच्या खूनप्रकरणी सरकारलाही सहआरोपी करायला पाहिजे..
याप्रकरणी संबंधित कंपनीच्या गुंडांवर तत्काळ हत्येचा गुन्हा दाखल करून त्यांच्या मुसक्या आवळाव्यात आणि यापुढं असं धाडस करण्याची कोणत्याही कंपनीची हिंमत होणार नाही असा धडा त्यांना शिकवावा. या रक्तपिपासू फायनान्स कंपन्यांना वेळीच वेसण घातली नाही, तर महाराष्ट्रातील रोज अशा अनेक शेतकऱ्यांचा खून पडत राहील आणि याला सर्वस्वी सरकार जबाबदार असेल..!
– रोहित पवार (@RRPSpeaks) 24 अक्टूबर, 2026
रोहित पवार ने कहा कि हमने सरकार से बार-बार अपील की है कि इन कंपनियों की मनमानी और गुंडागर्दी पर लगाम लगाई जाए, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार को सिर्फ पूंजीपतियों के हितों की रक्षा करने में ही दिलचस्पी है. इसलिए इस किसान की हत्या के मामले में सरकार को भी सह आरोपी माना जाना चाहिए. अगर इन खून की प्यासी फाइनेंस कंपनियों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो महाराष्ट्र में हर दिन ऐसे कई किसानों की हत्या होती रहेगी, और इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी. सरकार को समय रहते इन पर लगाम लगानी चाहिए, वरना हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा.