एग्रीवेट: हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने गोहाना, सोनीपत, खरखौदा और गन्नौर की अनाज मंडियों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने धान की खरीद, मंडियों से फसल उठाने और किसानों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया. दौरे के दौरान मंत्री ने किसानों, आढ़तियों और अधिकारियों से बातचीत कर खरीद प्रक्रिया की जानकारी ली और उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है. धान की खरीद में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
राणा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है. उन्होंने अधिकारियों को धान की खरीद सुचारू रूप से कराने के निर्देश दिए. साथ ही, खरीदे गए धान को मंडियों से जल्द उठाने को कहा, ताकि मंडियों में फसल का ढेर न लगे और अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को परेशानी न हो.फसल की वास्तविक पैदावार और पोर्टल पर दर्ज मात्रा में अंतर को लेकर मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. अगर खेत में फसल की पैदावार पोर्टल पर दर्ज मात्रा से ज्यादा है, तो किसान संबंधित मंडी सचिव से संपर्क कर सकते हैं. नियमों के अनुसार इस अंतर को दूर किया जाएगा.
राणा ने किसानों से धान को अच्छी तरह सुखाकर मंडियों में लाने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि धान में नमी ज्यादा होने से सरकारी खरीद में दिक्कत आ सकती है. पराली जलाने से बचने की अपील करते हुए राणा ने किसानों को फसल के अवशेष खेत की मिट्टी में मिलाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, अगली फसल को फायदा होगा और पर्यावरण को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा.
बता दें कि 21 अक्टूबर को किसानों के लगातार विरोध और मांगों के बाद राज्य सरकार ने अतिरिक्त धान की खरीद की अनुमति देने के निर्देश जारी किए थे. इसके तहत जिन किसानों की वास्तविक पैदावार तय सीमा से ज्यादा है, उनकी अतिरिक्त उपज का सत्यापन करने के बाद खरीद की जा सकेगी. केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार ने खरीफ विपणन सीजन (KMS) के लिए हर जिले में धान खरीद की सीमा तय की थी. हालांकि, किसान इस पाबंदी से खुश नहीं थे और लगातार इसमें छूट देने की मांग कर रहे थे. राज्य सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए हर जिले में प्रति एकड़ धान की पैदावार की सीमा तय की थी. यह सीमा पिछले तीन साल की औसत पैदावार के आधार पर तय की गई थी. अलग-अलग जिलों में यह सीमा 21.39 क्विंटल से 29.26 क्विंटल प्रति एकड़ तक रखी गई थी.