एग्रीवेट: 22 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई से पहले करें ये जरूरी काम, जानें खाद और बीज का सही तरीका – खरीफ फसलों की कटाई के बाद किसान अब रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन गेहूं की बंपर पैदावार के लिए सिर्फ अच्छे बीजों का चुनाव करना ही काफी नहीं है, बल्कि बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी, बीजोपचार और खाद का उचित इस्तेमाल भी बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर आप भी गेहूं की खेती करने जा रहे हैं, तो बुवाई से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर फसल की अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं।
गेहूं की खेती के लिए ऐसी मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें पानी को रोककर रखने की मध्यम क्षमता हो और जल निकासी की उचित व्यवस्था हो। दोमट और चिकनी दोमट मिट्टी में गेहूं की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 8 के बीच होना बेहतर माना जाता है।
अच्छे उत्पादन के लिए किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और खेती की परिस्थितियों के अनुकूल गेहूं की किस्म का चयन करना चाहिए। गेहूं की प्रमुख किस्मों में करण नरेंद्र (DBW 222), करण वंदना (DBW 187), करण श्रिया (DBW 252) और करण वैष्णव (DBW 303) शामिल हैं। इनके अलावा DBW 173, DBW 110, DBW 88, DBW 621-50, DBW 39, DBW 327, DBW 332, DBW 90 और DBW 71 जैसी किस्में भी दी गई हैं। किस्म का चुनाव करते समय किसानों को अपने क्षेत्र के लिए उसकी उपयुक्तता और बुवाई के समय का ध्यान रखना चाहिए।
गेहूं की फसल को बीज से फैलने वाले रोगों से बचाने के लिए बीजोपचार महत्वपूर्ण है। छिदरा कंड रोग के प्रति संवेदनशील किस्मों के बीजों को सौर उपचार या गर्म पानी से उपचारित करने की सलाह दी गई है। यदि गेहूं के बीज का उपयोग केवल बुवाई के लिए किया जा रहा है, तो दिए गए कृषि मार्गदर्शन के अनुसार वीटावैक्स या थायरम का 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से इस्तेमाल किया जा सकता है। बीजोपचार करते समय संबंधित उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।
सिंचित क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाली गेहूं की किस्मों की बुवाई सामान्यतः नवंबर के पहले पखवाड़े से दूसरे पखवाड़े के बीच करना उपयुक्त रहता है। कुछ परिस्थितियों में दिसंबर में भी बुवाई की जाती है, लेकिन इसके लिए कम अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन करना बेहतर होता है। देर से बुवाई करने पर उपज में कमी आ सकती है। बुवाई के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
समय पर बुवाई करने से फसल को अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं और उपज में होने वाली संभावित कमी से बचने में मदद मिलती है।
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में पर्याप्त पोषक तत्वों का होना जरूरी है। बुवाई से 5 से 6 सप्ताह पहले खेत में 2 से 3 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद या अन्य जैविक पदार्थ मिलाने की सलाह दी गई है। सिंचित गेहूं की फसल के लिए दिए गए सामान्य पोषक तत्व संबंधी मार्गदर्शन के अनुसार प्रति हेक्टेयर औसतन निम्न मात्रा की जरूरत बताई गई है:
नाइट्रोजन पौधों की बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, फॉस्फोरस की कमी से पौधों में कल्ले कम बन सकते हैं। पोटाश की जरूरत का निर्धारण भी मिट्टी की स्थिति के आधार पर करना चाहिए।
फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय देने का सामान्य सुझाव दिया गया है। नाइट्रोजन की बची हुई आधी मात्रा को दो बराबर भागों में बांटकर ताज मूल जड़ें बनने के समय और गांठ बनने से पहले देने की सलाह दी गई है। सिंचित परिस्थितियों में देर से बोई जाने वाली गेहूं की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर पोषक तत्वों की बताई गई मात्रा इस प्रकार है: