सोयाबीन की 90% फलियां पीली पड़ते ही करें कटाई, देरी से फसल में हो सकता है नुकसान, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 28 सितंबर 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन की 90% फलियां पीली पड़ते ही करें कटाई, देरी से फसल में हो सकता है नुकसान – सोयाबीन किसानों के लिए फसल की कटाई का सही समय बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर (ICAR-NSRI) की 21 से 27 सितंबर 2026 की साप्ताहिक एडवाइजरी के अनुसार, शीघ्र अवधि में पकने वाली सोयाबीन की किस्में अब परिपक्वता और कटाई की ओर बढ़ रही हैं, जबकि मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों में दाना भरने की अवस्था है। संस्थान ने किसानों को फसल की अवस्था के अनुसार जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

ICAR-NSRI के अनुसार, शीघ्र पकने वाली सोयाबीन की किस्मों में जब करीब 90 प्रतिशत फलियों का रंग पीला पड़ जाए, तब कटाई शुरू की जा सकती है। इस अवस्था में समय पर कटाई करने से बीज के अंकुरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही, देर से कटाई के कारण होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।

संस्थान ने सलाह दी है कि सोयाबीन की कटी हुई फसल को धूप में सुखाने के बाद गहाई करें। यदि कटाई के तुरंत बाद गहाई करना संभव नहीं है तो फसल को बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर एकत्र करके रखें। इससे बारिश के कारण कटी हुई फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा।

यदि सोयाबीन की उपज का उपयोग आगामी वर्ष बीज के रूप में करना है, तो गहाई के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ICAR-NSRI के अनुसार, ऐसी फसल की गहाई 350 से 400 RPM पर करनी चाहिए, ताकि बीज की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव न पड़े।

बीज उत्पादन वाले खेतों में सोयाबीन के बीज की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कीटों से बचाव के लिए फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। जरूरत होने पर प्रोफेनोफोस @ 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर का निर्धारित मात्रा और अनुशंसित विधि के अनुसार छिड़काव किया जा सकता है। इससे स्टिंक बग, अलमंड मॉथ और पल्स बीटल जैसे कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

मध्यम और देर से पकने वाली सोयाबीन की किस्मों में इस समय दाना भरने की अवस्था है। इस दौरान फसल की फलियों पर फली छेदक इल्ली, विशेषकर Helicoverpa armigera, के नुकसान की संभावना रहती है। यह इल्ली फलियों में छेद करके अंदर प्रवेश करती है और विकसित हो रहे दानों को खाती है। इससे दानों को नुकसान होने के साथ प्रभावित दानों के सड़ने की संभावना भी रहती है। इसलिए किसानों को नियमित रूप से फसल और फलियों का निरीक्षण करने की सलाह दी गई है।

जरूरत होने पर इंडोक्साकार्ब 15.80% EC @ 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या एडवाइजरी में दिए गए अन्य अनुशंसित कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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