एग्रीवेट: देश में टमाटर किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ सूखे जैसे हालात हैं, तो दूसरी ओर टमाटर की कीमतों में तेज गिरावट आई है. देश की प्रमुख थोक मंडियों में शामिल महाराष्ट्र की पिंपलगांव APMC में एक हफ्ते के दौरान टमाटर के भाव करीब 65 फीसदी गिर गए हैं. यहां 20 किलो की एक क्रेट का थोक भाव घटकर 111 रुपये रह गया है. इसकी वजह बाजार में टमाटर की ज्यादा आवक और मांग कमजोर होना है. वहीं, राजष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टमाटर अभी 40 रुपये किलो बिक रहा है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर एक हफ्ते तक इसी तरह होलसेल कीमत में गिरावट जारी रही, तो इसका असर आने वाले दिनों में दिल्ली के रिटेल मार्केट में देखने को मिल सकता है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक में खुदरा बाजार में भी टमाटर के दाम आधे रह गए हैं. सोमवार को टमाटर करीब 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जबकि एक हफ्ते पहले इसकी कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलो थी. एक खुदरा विक्रेता ने कहा कि थोक बाजार में कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में एक-दो दिन लगते हैं. अगर थोक भाव में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी टमाटर की कीमतें और कम हो सकती हैं.
महाराष्ट्र की पिंपलगांव APMC मंडी में टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट आई है. 12 अक्टूबर को 20 किलो टमाटर की क्रेट का औसत थोक भाव 321 रुपये था, जो सोमवार को घटकर सिर्फ 111 रुपये रह गया. यानी एक क्रेट की कीमत में 210 रुपये की गिरावट आई है. इससे पहले से बढ़ती खेती की लागत से परेशान किसानों की चिंता और बढ़ गई है. मंडी के एक अधिकारी के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से रोजाना 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट टमाटर मंडी पहुंच रहे हैं. बाजार में टमाटर की आवक बढ़ गई है, जबकि मांग उतनी नहीं है. इसी वजह से कीमतों में भारी गिरावट आई है.
सोमवार को मंडी में टमाटर की गुणवत्ता के हिसाब से एक क्रेट का भाव 20 रुपये से लेकर 331 रुपये तक रहा. खराब गुणवत्ता वाले टमाटर सिर्फ 1 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिके, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर का भाव 16.55 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा. कारोबारियों का कहना है कि अगर आवक ज्यादा बनी रही, तो कीमतें और गिर सकती हैं.
कारोबारियों के मुताबिक, तापमान बढ़ने से टमाटर सामान्य समय से पहले पक रहे हैं. इसके चलते मंडी में टमाटर की आवक बढ़ गई है. APMC के टमाटर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गर्मी के कारण टमाटर जल्दी पक रहे हैं, जिससे बाजार में उनकी आपूर्ति बढ़ गई है. ज्यादा आपूर्ति और कमजोर मांग के कारण किसानों को कम दाम मिल रहे हैं.
टमाटर की मांग में कमी ने भी किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. APMC अधिकारियों के मुताबिक, नवरात्र के दौरान कई थोक मंडियां बंद रहने से कारोबार धीमा रहा. इसके अलावा, विदेशों से टमाटर की मांग भी कमजोर हुई है. वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े खपत वाले राज्य फिलहाल अपनी जरूरत स्थानीय स्तर पर मिलने वाले टमाटर से पूरी कर रहे हैं. इससे महाराष्ट्र के नासिक से आने वाले टमाटर पर इन राज्यों की निर्भरता कम हो गई है. मांग घटने और मंडी में आवक बढ़ने के कारण टमाटर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.