पंजाब में तेजी से बढ़ रहे पराली जलाने के मामले, सिर्फ दो जिलों में 80 फीसदी केस..सरकार की बढ़ी टेंशन – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: पंजाब में धान की कटाई तेज होने के साथ ही पराली जलाने के मामले भी बढ़ने लगे हैं. राज्य में इस खरीफ सीजन में अब तक खेतों में आग लगाने की 220 घटनाएं दर्ज की गई हैं. यह संख्या पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 208 मामलों से ज्यादा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के तय मानकों के तहत ये घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से 191 खेतों का निरीक्षण किया गया, जबकि 68 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि मौके पर जांच के दौरान हुई.

हर साल पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने की प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू होती है. यह धान की सरकारी खरीद शुरू होने की तारीख 1 अक्टूबर से करीब दो सप्ताह पहले है. पिछले साल पंजाब में पराली जलाने के कुल 5,114 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 10,909 थी. यानी पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई थी.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में इस खरीफ सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में तरनतारन और अमृतसर जिले सबसे आगे हैं. राज्य के 23 जिलों में अब तक दर्ज 220 घटनाओं में से 176 मामले इन दोनों जिलों में सामने आए हैं. यानी कुल घटनाओं में करीब 80 फीसदी मामले तरनतारन और अमृतसर के हैं. आंकड़ों के मुताबिक, तरनतारन में पराली जलाने की 95 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि अमृतसर में 81 मामले सामने आए. फिरोजपुर में 10, गुरदासपुर और मुक्तसर में पांच-पांच घटनाएं दर्ज हुईं. वहीं, जालंधर, कपूरथला, मोगा, पटियाला, मोहाली और संगरूर में तीन-तीन मामले सामने आए. फाजिल्का में दो, जबकि फरीदकोट, होशियारपुर, लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर में एक-एक घटना दर्ज की गई. राज्य के बाकी सात जिलों में अब तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है.

धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाना अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जाता है. धान की कटाई के बाद किसानों के पास गेहूं की बुवाई के लिए कम समय होता है. ऐसे में कुछ किसान खेत जल्दी खाली करने के लिए पराली जला देते हैं. वहीं, दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाला प्रदूषण भी स्थिति को और गंभीर बना सकता है. प्रतिबंधों के बावजूद हर साल पटाखे जलाने के मामले सामने आते हैं.

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने के नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. कुल 65 मामलों में 3.35 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया. इसमें से 17 अक्टूबर तक 1.45 लाख रुपये वसूले जा चुके थे. इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत 19 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गईं. अधिकारियों ने खेतों के रिकॉर्ड में 41 रेड एंट्री भी कीं. वहीं, निगरानी और जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को 94 चेतावनी नोटिस या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए.

पंजाब में पराली जलाने के मामलों पर कार्रवाई के तहत अब तक दर्ज 19 प्राथमिकी (एफआईआर) में से 12 तरनतारन जिले में दर्ज की गई हैं. इसके बाद अमृतसर में तीन प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज हुईं. फिरोजपुर, गुरदासपुर, पटियाला और संगरूर में एक-एक मामला दर्ज किया गया है. पराली जलाने के मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना भी लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, तरनतारन में सबसे ज्यादा 1.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि अमृतसर में 1.30 लाख रुपये का जुर्माना लगा है. हालांकि, लगाए गए जुर्माने की बड़ी रकम अब तक वसूली नहीं जा सकी है.

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या 200 के पार पहुंचने के बाद अधिकारियों ने खेतों में जांच और कार्रवाई तेज कर दी है. पिछले सप्ताह बारिश के बाद धान की कटाई में तेजी आई है. ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है. अधिकारी घटनाओं का पता लगाने के लिए सैटेलाइट से मिलने वाले अलर्ट, खेतों का मौके पर निरीक्षण और जिला स्तर पर निगरानी का सहारा ले रहे हैं.

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