एग्रीवेट: तमिलनाडु सरकार ने चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. राज्य में 250 सहकारी दुकानों पर बढ़िया किस्म का चावल 30 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा. खाद्य मंत्री पी. वेंकटरमणन ने इसकी एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि . इन 250 दुकानों में सहकारिता विभाग के सुपरमार्केट और मिनी-सुपरमार्केट के साथ तमिलनाडु नागरिक आपूर्ति निगम (TNCSC) के अमुधम स्टोर भी शामिल हैं. फिलहाल पोन्नी जैसी बढ़िया किस्मों के चावल की कीमत 75 से 90 रुपये प्रति किलो तक है. खास बात यह है कि इस योजना के तहत अगले कुछ दिनों में बाजार में करीब एक लाख टन चावल उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से आम जनता को राहत मिलेगी.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि कीमतों पर नजर रखने वाली समितियों की बैठक जल्द होगी. इसमें चावल, अरहर दाल, गेहूं और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी. मंत्री पी. वेंकटरमणन ने कहा कि कीमतों पर निगरानी रखने वाली समितियों की बैठक में चर्चा के आधार पर दाम कम करने के लिए कदम उठाए जाएंगे. इसके अलावा, सहकारी दुकानों पर 130 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही अरहर दाल की उपलब्धता भी बढ़ाई जाएगी. फिलहाल बाजार में अरहर दाल 170 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रही है. सरकार का मकसद लोगों को जरूरी खाद्य पदार्थ कम कीमत पर उपलब्ध कराना है.
खाद्य मंत्री पी. वेंकटरमणन ने कहा कि चेन्नई समेत शहरी इलाकों में बढ़िया किस्म के चावल की खपत बढ़ने से इसकी मांग में इजाफा हुआ है. वहीं, कम उत्पादन के कारण आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से चावल की आपूर्ति घट गई है. इससे बाजार में चावल की कमी हुई है और कीमतें बढ़ी हैं. मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े चावल मिल मालिक भी बढ़िया किस्म के चावल का भंडारण कर रहे हैं. इससे बाजार में इसकी कमी बढ़ रही है और कीमतों पर असर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में उगाए जाने वाले बढ़िया किस्म के पोन्नी चावल की कीमत राज्यभर के सहकारी सुपरमार्केट में फिलहाल 60 रुपये प्रति किलो है. कीमतों से परेशान लोग सहकारी दुकानों और अमुधम स्टोर से चावल और अरहर दाल खरीद सकते हैं. चावल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक आलोचना पर मंत्री ने कहा कि वह आम लोगों की परेशानी समझते हैं. उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्होंने उचित मूल्य की दुकानों पर जरूरी सामान खरीदने के लिए लंबी कतारों में लगने का अनुभव किया है.