भारत मंडपम में राइस कॉन्फ्रेंस, 150 देशों के खरीदार होंगे शामिल.. चावल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा? – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: भारत के चावल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) का आयोजन किया जा रहा है. यह तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा. सम्मेलन शुरू होने से पहले ही कारोबार से जुड़ी 2,038 बैठकों का कार्यक्रम तय किया जा चुका है. इसका उद्देश्य भारतीय चावल निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच कारोबार को बढ़ावा देना है.

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में 150 से ज्यादा देशों के 4,649 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब  जैसे देश शामिल हैं. आयोजकों के मुताबिक, लगातार दूसरे साल सम्मेलन में प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध जगह पूरी तरह बुक हो चुकी है. इसमें 180 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा लेंगी.

सम्मेलन में भारतीय चावल आपूर्तिकर्ताओं और विदेशी खरीदारों के बीच आमने-सामने कारोबारी बैठकें होंगी. इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन बैठकों के आयोजन में EY सहयोग कर रहा है. सम्मेलन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत चावल उत्पादन और व्यापार से जुड़े कई राज्यों की भागीदारी होगी.

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 में देशभर से चावल उद्योग से जुड़े कारोबारियों की भागीदारी देखने को मिलेगी. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने बिजनेसलाइन से कहा कि सम्मेलन में भारतीय कारोबारियों की अच्छी भागीदारी के साथ विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक, करीब 91 फीसदी रजिस्ट्रेशन दिल्ली के बाहर से हुए हैं.

देव गर्ग के मुताबिक, कुल रजिस्ट्रेशन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.1 फीसदी है. इसके बाद दिल्ली की 9.2 फीसदी, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की 8.4-8.4 फीसदी और गुजरात की 8.2 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं, तमिलनाडु से 6.2 फीसदी, मध्य प्रदेश से 5.2 फीसदी और कर्नाटक से 5.1 फीसदी रजिस्ट्रेशन हुए हैं. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि देश के अलग-अलग राज्यों के कारोबारी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. इसका मकसद भारतीय चावल उद्योग को दुनिया भर के खरीदारों से जोड़ना और कारोबार के नए अवसर पैदा करना है.

23 और 24 अक्टूबर को सम्मेलन में जानकारी और चर्चा के लिए 9 सत्र आयोजित किए जाएंगे. इनमें वैश्विक बाजार में चावल की मांग और आपूर्ति, निर्यात के अवसर, माल ढुलाई की लागत, भुगतान से जुड़े जोखिम, गुणवत्ता मानक और सरकारी नीतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. इन सत्रों के जरिए चावल कारोबार से जुड़े लोगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और निर्यात की चुनौतियों को समझने का मौका मिलेगा.

सम्मेलन में 2027 के लिए चावल कारोबार के 10 प्रमुख बाजारों की सूची भी जारी की जाएगी. इसमें ऐसे देशों और बाजारों की पहचान  की जाएगी, जहां भारतीय बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात की संभावनाएं हैं. इसके लिए मांग, प्रतिस्पर्धा, कीमतों, बाजार तक पहुंच और भुगतान से जुड़े जोखिमों का आकलन किया जाएगा. सम्मेलन के अन्य सत्रों में निर्यात भुगतान, बीमा, प्रमाणन, टिकाऊ उत्पादन, चावल मिलों के मुनाफे और मूल्यवर्धित उत्पादों पर चर्चा होगी. इसका उद्देश्य चावल निर्यातकों और प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े कारोबारियों को बाजार के रुझान समझने में मदद करना है. इससे उन्हें कारोबार बढ़ाने, निवेश करने और निर्यात से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकेगी.

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