एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों को चकबंदी से जुड़ी समस्याओं से राहत देने और जमीन के विवादों को जल्द सुलझाने के लिए कई कदम उठाए हैं. प्रदेश के 8 जिलों के 11 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. साथ ही, लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान भी चलाएगी. इसके तहत बिना विवाद वाले उत्तराधिकार और जमीन के नामांतरण से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाएगा. इससे किसानों को जमीन से जुड़े कामों में राहत मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी आसानी होगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके चकबंदी के मामलों को निपटाने की कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने चार जिलों के छह गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर करने का फैसला लिया है. इसके लिए उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत कार्रवाई की गई है. इन गांवों में उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद, बरेली का मगरासा, बुलंदशहर का बराल और बांदा का काजीपुर (गिरवां) शामिल हैं. इनमें उन्नाव के तीन गांवों और बरेली के मगरासा में पिछले 12 साल से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी. वहीं, बुलंदशहर के बराल गांव में सात साल और बांदा के काजीपुर गांव में दो साल से यह काम लंबित था.
इन गांवों में चकबंदी का काम आगे बढ़ाने में कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं. कहीं ग्राम विकास योजना के तहत काम चल रहे थे, तो कहीं नदी के कटाव से जमीन प्रभावित हुई थी. कुछ गांवों में चकबंदी के योग्य जमीन 40 प्रतिशत से कम थी. वहीं, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने और गुटबाजी व राजनीतिक विवादों के कारण भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी. इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने इन गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर करने का फैसला लिया.
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने अधिकारियों को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. इस दौरान जमीन के निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाएगा. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन मामलों का तय समयसीमा के भीतर शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करें.
अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र भी देना होगा कि जिले में तय समयसीमा से अधिक समय से कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला लंबित नहीं है. अभियान के बाद भी ऐसे मामले लंबित रहने पर संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं.
उत्तर प्रदेश में चकबंदी न्यायालयों में लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं. इसके तहत तीन साल से अधिक समय से लंबित वादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा. सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी और चकबंदी अधिकारियों को इस काम में तेजी लाने के लिए कहा गया है. लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा अधिकारियों को अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी से जुड़े रिकॉर्ड का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं. यह निरीक्षण उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के तहत किया जाएगा. अधिकारियों को निरीक्षण से जुड़ी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी.