एग्रीवेट: राजस्थान में रबी फसलों की बुवाई के बीच DAP और यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं. खाद लेने के लिए किसानों को दूर-दूर तक जाना पड़ रहा है. वहीं, आरोप है कि बाजार में खाद की कालाबाजारी हो रही है और किसानों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. सरकार की ओर से DAP के एक बैग की कीमत 1,350 रुपये तय है, लेकिन किसानों को यह 2,000 से 2,200 रुपये में बेचा जा रहा है. इसी तरह, 266.50 रुपये की यूरिया की बोरी के लिए कालाबाजारी में करीब 500 रुपये वसूले जा रहे हैं.
राजस्थान के प्रमुख सरसों उत्पादक जिलों में शामिल टोंक में भी खाद की कमी देखने को मिल रही है. पीपलू तहसील के डोडवाली गांव के किसान गोपीलाल जाट ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि वह खाद लेने के लिए कई बार टोंक शहर जा चुके हैं, लेकिन हर बार खाद मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है. गोपीलाल जाट का परिवार 18 बीघा जमीन पर खेती करता है. परिवार सरसों और चने की फसल उगाता है, जबकि कभी-कभी गेहूं की बुवाई भी करता है. उन्होंने कहा कि उन्हें टोंक और पीपलू से कुछ खाद मिल गई है, लेकिन उनके भाई अब भी खाद मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
किसान गोपीलाल जाट ने कहा कि किसान सुबह जल्दी खाद लेने के लिए टोंक शहर जाते हैं. इसके बावजूद कई बार उन्हें बिना खाद के ही लौटना पड़ता है. उन्होंने कहा कि रबी फसलों की बुवाई का समय आ गया है, लेकिन किसानों को अब तक खाद नहीं मिल पा रही है. वहीं, किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खाद का पर्याप्त स्टॉक नहीं है और इसकी जमाखोरी व कालाबाजारी की जा रही है.
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को ज्ञापन सौंपकर खाद की कमी दूर करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पर्याप्त खाद उपलब्ध होने के दावों के बावजूद कमी के कारण किसानों को सरसों की बुवाई में परेशानी हो रही है. रामपाल जाट ने राज्य के कृषि मंत्री के हवाले से बताया कि 1 अक्टूबर तक राजस्थान में DAP की कुल जरूरत 2.004 लाख टन थी, जबकि उपलब्धता केवल 1.41 लाख टन थी. इस तरह राज्य में DAP की 58,600 टन की कमी थी.