प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के एक साल पूरे, राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सहभागिता – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: सालभर पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ (PMDDKY) के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सहभागिता

​”योजनाओं के कन्वर्जेंस से बदलती है जमीनी तस्वीर”: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ के तहत उत्कृष्ट जिलों को किया सम्मानित

​”मनुष्य ठान ले तो असंभव कुछ नहीं”: कृषि में चमत्कार कर रहे पिछड़े जिलों के कलेक्टर्स से बोले शिवराज सिंह चौहान- परिश्रम की पराकाष्ठा करें

​’मोदी शैली’ का सुशासन: अलग-अलग विभाग जब एक दिशा में चलते हैं, तो आकांक्षी जिले भी रचते हैं नया इतिहास- शिवराज सिंह चौहान

​जल संरक्षण से प्राकृतिक खेती तक: महाराष्ट्र के गढ़चिरोली, आंध्र के अल्लूरी सीताराम राजू और बिहार के बांका जिले की सफलता बनी देश के लिए मिसाल- शिवराज सिंह ने बढ़ाया हौंसला

​”पूर्वी भारत और पिछड़े जिलों में बढ़े किसान क्रेडिट का प्रवाह, राइस-फेलो में दलहन से बढ़ेगी आय”: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह का कलेक्टर्स को मंत्र

​मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में तीन गुना गति से होगा विकास, कृषि को समृद्ध और किसान को आत्मनिर्भर बनाने का महायज्ञ तेज- शिवराज सिंह

​प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: कृषि, जल शक्ति, खाद्य प्रसंस्करण और डेयरी के साझा समन्वय से गांवों में बहेगी समृद्धि की बयार- शिवराज सिंह

​नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026, “जब नीतियां जमीन से बनती हैं और सरकार के सभी विभाग एक दिशा में मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी जिला विकास की दौड़ में पीछे नहीं रह सकता। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन की शैली है।” यह प्रेरक उद्गार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर के भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम सभागार में आयोजित ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ (PMDDKY) के राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यक्त किए।

देशभर से जुटे 50 से अधिक जिलों के कलेक्टर्स, वैज्ञानिकों और वरिष्ठ नीति-निर्माताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवरात्रि के पावन अवसर पर बधाई देने के साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया और आह्वान किया कि प्रधानमंत्री के विकसित व समृद्ध भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी अधिकारी अपनी संपूर्ण ऊर्जा झोंक दें।

​”योजना दिल्ली से नहीं, जिले से बनती है”-शिवराज सिंह चौहान

​केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि धन-धान्य कृषि योजना का खाका दिल्ली के दफ्तरों में नहीं, बल्कि जिलों की वास्तविक परिस्थितियों को देखकर कलेक्टर्स द्वारा तैयार किया गया है। ​उन्होंने जोर देकर कहा कि

​नियमित मासिक समीक्षा जरूरी है। कलेक्टर अपनी टीम के साथ हर महीने जिले में कृषि कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करें। जहाँ प्रगति धीमी है, वहाँ समन्वय से गति बढ़ाई जाए। ​अंतर-विभागीय कन्वर्जेंस (समन्वय) की बात करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि कृषि के साथ जल शक्ति मंत्रालय से पानी का प्रबंध, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से उपज की प्रोसेसिंग व वैल्यू एडिशन, सहकारिता मंत्रालय व किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की ताकत, और पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन तथा एमएसएमई कौशल विकास को एक साथ जोड़कर किसानों की आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है।

वैज्ञानिकों के सीधे जुड़ाव पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), ‘आत्मा’ (ATMA), कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के लगभग 16,000 वैज्ञानिकों के शोध को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया जाए।

चौहान ने कहा कि इस योजना में उन 100 जिलों को प्राथमिकता दी गई है जो उत्पादकता में पीछे थे, जहाँ फसल सघनता (Cropping Intensity) कम थी और जहाँ संस्थागत ऋण (Credit Flow) का अभाव था। ​उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि ​राइस-फेलो और इंटर-क्रॉपिंग यानी धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों (Rice Fallow) में दलहन और तिलहन की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दिया जाए। साथ ही ​किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का विस्तार करते हुए पूर्वी भारत और पिछड़े जिलों में ऋण का प्रवाह तेजी से बढ़ाया जाए, क्योंकि जब किसान के हाथ में पूंजी होगी, तभी वह उन्नत तकनीक और बेहतर बीज-खाद का उपयोग कर पाएगा।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों में नया जोश भरते हुए प्रसिद्ध पंक्तियां साझा कीं:

“कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…”, ​उन्होंने कलेक्टर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि जब मनुष्य ठान लेता है, तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति उसे रोक नहीं सकती: ​“तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को तोड़ दे,

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तीसरे कार्यकाल में तीन गुना गति और ताकत से काम करने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए कृषि और ग्रामीण विकास तंत्र अपनी पूरी क्षमता झोंक देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अगली समीक्षा बैठक में प्रतिस्पर्धा इतनी तीव्र होगी कि कई अन्य जिले भी इस उत्कृष्ट मंच पर सम्मान पाने के हकदार बनेंगे।

समारोह के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों को उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने मंच से अपनी सफलता की केस स्टडी साझा की: गढ़चिरोली (महाराष्ट्र): जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन (Drought Resilience) के जरिए सूखे से जूझते क्षेत्र को हरा-भरा बनाकर उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया। ​अल्लूरी सीताराम राजू जिला (आंध्र प्रदेश): रायलसीमा जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्र में कम पानी की खपत वाली हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर (बागवानी) फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। ​बांका (बिहार):’लीलावरण प्राकृतिक खेती भूमि पुनरुद्धार मॉडल’ (Lilawaran Natural Farming Land Revival Model) के जरिए रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म कर प्राकृतिक खेती की नई क्रांति शुरू की। ​इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, छत्तीसगढ़ के कोरबा और पंजाब के फाजिल्का जिले द्वारा किए गए कृषि नवाचारों की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री  रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री  कृष्ण पाल गुर्जर सहित कृषि, जल शक्ति और ग्रामीण विकास मंत्रालय की सहभागिता रही। प्रशासनिक स्तर पर केंद्रीय कृषि सचिव  अतीश चंद्रा, पशुपालन एवं डेयरी सचिव नरेश पाल गंगवार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सचिव  अविनाश जोशी, भूमि संसाधन विभाग के सचिव  दिलीप कुमार, ग्रामीण विकास सचिव  रोहित कंसल, जल संसाधन सचिव मती अर्चना वर्मा तथा आईसीएआर (ICAR) के महानिदेशक एवं डेयर (DARE) सचिव डॉ. एम. एल. जाट, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक सचिव मती मनिंदर कौर द्विवेदी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव, 50 से अधिक जिलों के जिला कलेक्टर और केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ फील्ड अधिकारी इस मंथन में शामिल हुए।

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