एग्रीवेट: 01 अक्टूबर2026, भोपाल: अमूल, इफको और कृभको की तर्ज पर सशक्त बनेगा मध्यप्रदेश बीज संघ – सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मध्यप्रदेश बीज संघ की आम सभा की बैठक में संस्था की वर्तमान गतिविधियों और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए बीज उत्पादन से लेकर किसानों तक उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश बीज संघ को अमूल, इफको और कृभको की तर्ज पर सशक्त एवं अग्रणी सहकारी संस्था के रूप में विकसित करने के प्रयासों को और गति दी जाए।
मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आगामी 2 से 5 वर्षों में मध्यप्रदेश बीज संघ को देश के प्रमुख बीज संस्थानों में स्थापित करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। इसके लिए बीज उत्पादन के साथ अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और विपणन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, बेहतर फसल, उन्नत खेती और किसान की समृद्धि की पूरी श्रृंखला को सहकारिता के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के साथ बीज उत्पादन में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध होने के साथ फसल उत्पादन और उत्पादकता में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।नई फसलों और तकनीकी नवाचार पर फोकस
मंत्री श्री सारंग ने बताया कि मध्यप्रदेश बीज संघ द्वारा हॉर्टीकल्चर और धान के साथ-साथ तिल, अलसी, कपास, मूंगफली और मक्का जैसी महत्वपूर्ण फसलों के बीजों पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कृषि विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने छोटे आकार के बीजों में उन्नत कोटिंग एवं लोडिंग तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम करने की जानकारी दी। इस दिशा में वैज्ञानिकों के साथ आवश्यक बैठकें और चर्चा की जा चुकी हैं। मंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाकर गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार किया जा सकता है।
मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि बीजों की बिक्री और वितरण व्यवस्था को प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से और मजबूत किया जाए। इसका उद्देश्य प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों को किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में पैदा होने वाली स्थानीय और पारंपरिक फसलों को भी बीज उत्पादन एवं विपणन की कार्ययोजना में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे स्थानीय कृषि विविधता को बढ़ावा मिलने के साथ पारंपरिक फसलों के संरक्षण और उनके व्यवस्थित उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
बैठक में बीज संघ की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी वर्षों के लिए कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। मंत्री ने संस्था की गतिविधियों को किसान केंद्रित बनाने और उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।