750 किसानों की मेहनत से बदली तस्वीर, शहद और मिलेट्स के दम पर खड़ा किया 1 करोड़ का कारोबार – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Success Story: खेती-किसानी में कमाई बढ़ाने के लिए जरूरी नहीं कि किसान सिर्फ अपनी फसल बेचने तक ही सीमित रहें. अगर किसान मिलकर अपनी उपज से नए प्रोडक्ट तैयार करें और उन्हें अपने ब्रांड के नाम से बाजार में बेचें, तो कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में अंकुर शर्मा इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं. मार्च 2023 में उन्होंने एक किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ (FPO) के जरिए किसानों को जोड़कर शहद और मोटे अनाज से बने प्रोडक्ट तैयार करने का काम शुरू किया. आज उनके संगठन से करीब 750 किसान जुड़े हैं. पिछले साल एफपीओ का कारोबार करीब 1 करोड़ रुपये रहा.

अंकुर शर्मा सहारनपुर के रहने वाले हैं. उनके मुताबिक, मार्च 2023 से उनका एफपीओ काम कर रहा है. इस संगठन से अलग-अलग तरह के किसान जुड़े हैं. इनमें शहद तैयार करने वाले मधुमक्खी पालक, मशरूम उगाने वाले किसान और फल-सब्जियों की खेती करने वाले किसान शामिल हैं. एफपीओ का मकसद किसानों को एक साथ लाकर उनकी उपज की बेहतर कीमत दिलाने और उससे जुड़े कामों को आगे बढ़ाना है. इसके लिए संगठन शहद और मोटे अनाज की प्रोसेसिंग यानी उनसे खाने-पीने के प्रोडक्ट तैयार करने पर काम कर रहा है.

अंकुर शर्मा ने बताया कि उनका एफपीओ मधुमक्खी पालक किसानों से कच्चा शहद खरीदता है. इसके बाद शहद को प्रोसेस करके अपने ब्रांड ‘स्वस्ति’ के नाम से बाजार में बेचा जाता है. इस तरीके से मधुमक्खी पालकों को अपनी उपज बेचने के लिए एक और बाजार मिलता है. वहीं, एफपीओ शहद को तैयार प्रोडक्ट के रूप में ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता है. इससे किसानों की उपज को सीधे कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उससे जुड़ा कारोबार खड़ा करने की कोशिश की जा रही है.

शहद के अलावा एफपीओ मोटे अनाज यानी मिलेट्स से भी खाने-पीने के प्रोडक्ट तैयार कर रहा है. इनमें बिस्किट, नमकीन और चिप्स जैसे उत्पाद शामिल हैं. मोटे अनाज को इस तरह के प्रोडक्ट में बदलने से किसानों की उपज का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. एफपीओ का यह काम किसानों को खेती के साथ खाद्य प्रोडक्ट बनाने और बेचने से जुड़े कारोबार से जोड़ने की दिशा में एक कदम है. हालांकि, इन उत्पादों की बिक्री और उनसे होने वाली कमाई का अलग-अलग आंकड़ा सामने नहीं आया है.

अंकुर शर्मा के मुताबिक, पिछले साल उनके एफपीओ का कुल कारोबार करीब 1 करोड़ रुपये रहा था. अब इस साल इसे बढ़ाकर करीब 2 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है. यानी संगठन अपने कारोबार को दोगुना करना चाहता है. अंकुर का कहना है कि एफपीओ की तरक्की के साथ उससे जुड़े किसानों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए. उन्होंने भारत सरकार, कृषि मंत्रालय और एएस मनिंदर कौर का भी सहयोग और एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए धन्यवाद दिया.

सहारनपुर का यह एफपीओ दिखाता है कि किसान मिलकर अपनी उपज से नए उत्पाद तैयार करने और उन्हें अपने ब्रांड के नाम से बेचने की दिशा में काम कर सकते हैं. अगर ऐसे कारोबार को बाजार और ग्राहकों का अच्छा साथ मिलता है, तो किसानों के लिए कमाई के नए अवसर बन सकते हैं.

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