हरियाणा में बाजरे का 2900 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य सुनिश्चित करने के निर्देश – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 01 अक्टूबर2026, चंडीगढ़: हरियाणा में बाजरे का 2900 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य सुनिश्चित करने के निर्देश – हरियाणा सरकार ने प्रदेश के बाजरा उत्पादक किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बाजरे का कुल 2900 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत किसानों को निर्धारित राशि का लाभ हर हाल में मिले। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से हरियाणा में अवैध रूप से बाजरा लाकर मंडियों में बेचने के प्रयासों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने   बाजरा एवं धान खरीद-2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सरकार 2300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बाजरे की खरीद करेगी। यदि किसान को खुले बाजार में इससे अधिक कीमत प्राप्त होती है तो बिक्री मूल्य और 2900 रुपए प्रति क्विंटल के बीच के अंतर की भरपाई सरकार द्वारा की जाएगी। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकृत किसानों को बाजरे का कुल 2900 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य सुनिश्चित करना है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष बाजरा खरीद के लिए पहले 2150 रुपए और बाद में 2200 रुपए प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की गई थी। खरीद मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान सरकार की ओर से अलग से किया गया था।

बाजरा खरीद और भावांतर भरपाई का लाभ ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड तथा जारी जे-फार्म के आधार पर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भूमि और फसल के एरिया वेरिफिकेशन का कार्य प्राथमिकता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य योजना का लाभ वास्तविक और पात्र हरियाणा के किसानों तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में बाजरे की कीमत हरियाणा की तुलना में कम होने के कारण दूसरे राज्यों से बाजरा लाकर हरियाणा की मंडियों में बेचने का प्रयास किया जा सकता है। इसे रोकने के लिए प्रदेश की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही अधिकारियों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ के तहत भूमि एवं फसल सत्यापन जल्द पूरा करने को कहा गया है, ताकि बाहरी राज्यों से आने वाले बाजरे को योजना का लाभ न मिल सके और सरकारी सहायता वास्तविक किसानों तक ही सीमित रहे।

बैठक में मुख्यमंत्री ने धान खरीद की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलों में राइस मिलर्स का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए। ऐसे राइस मिलर्स, जिनका पूर्व में अनियमितताओं में शामिल होना पाया गया है, उनका पंजीकरण नहीं किया जाएगा।जिन जिलों में पर्याप्त संख्या में राइस मिलर्स पंजीकृत नहीं होंगे, वहां के धान को दूसरे जिलों में पंजीकृत राइस मिलर्स को आवंटित करने की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों के राइस मिलर्स के पंजीकरण की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का जोर है कि बाजरा और धान दोनों की खरीद प्रक्रिया व्यवस्थित रहे और किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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