हरियाणा में 24 फीसदी कम बारिश, अंबाला और जींद में बहुत ज्यादा बुरा हाल.. भूजल पर बढ़ा दबाव – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: हरियाणा में इस मॉनसून सीजन अब तक सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक 313.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 411.6 मिमी होनी चाहिए थी. सितंबर में भी बारिश सामान्य से कम रही है. इस महीने राज्य में अब तक 34.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 58.1 मिमी रहती है. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा है. अंबाला में सामान्य से 49 फीसदी, जींद में 57 फीसदी और कैथल में 48 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं, करनाल में 45 फीसदी, रोहतक में 46 फीसदी और सिरसा में 53 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी सामान्य से कम बारिश हुई है. हिसार में बारिश की कमी 20 फीसदी, झज्जर में 16 फीसदी, पानीपत में 27 फीसदी, सोनीपत में 31 फीसदी और यमुनानगर में 18 फीसदी रही. वहीं, गुरुग्राम में सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई. यहां अब तक 477.6 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 473.2 मिमी होती है. द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह राज्य के कई जिलों में बारिश हुई. इससे बारिश के आंकड़ों में कुछ सुधार हुआ, लेकिन राज्य में कुल बारिश अब भी सामान्य से कम है. हिसार में 64.2 मिमी, जींद में 40.5 मिमी और पानीपत में 22.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं, फतेहाबाद में 13 मिमी, भिवानी में 12 मिमी, सिरसा में 11 मिमी, कैथल में 8 मिमी, नूंह में 14.5 मिमी, पलवल में 8 मिमी, सोनीपत में 11.5 मिमी और यमुनानगर में 19 मिमी बारिश हुई. करनाल में 8 मिमी बारिश दर्ज की गई. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, हरियाणा से मॉनसून अगले एक-दो दिन में वापस लौट सकता है. राज्य में सामान्य से कम बारिश होने का असर भूजल स्तर पर भी पड़ा है. खासकर धान की खेती वाले जिलों में सिंचाई के लिए भूजल पर दबाव बढ़ा है. आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने कहा कि करनाल, कैथल, अंबाला, सिरसा और हिसार धान की खेती वाले प्रमुख जिले हैं. इन जिलों में बारिश की कमी काफी ज्यादा रही है. उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण सिंचाई के लिए भूजल पर निश्चित रूप से दबाव बढ़ा है. वहीं, हरियाणा के दक्षिणी जिलों में बारिश पर निर्भर बाजरा और कपास की खेती होती है. बारिश कम होने से इन फसलों पर भी असर पड़ा है. वहीं, हरियाणा में धान खरीद सीजन को लेकर प्रदेश सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. बीते दिनों कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा था कि धान की फसल पकते ही उसकी खरीद शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने किसानों से अपील की कि धान को पूरी तरह पकने के बाद ही मंडियों में लेकर आएं. इससे खरीद के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और प्रक्रिया भी सुचारु रहेगी. कृषि मंत्री ने कहा कि इस बार प्रदेश में 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है.

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