एग्रीवेट: बासमती ने इस सीजन तेजी की रफ्तार पकड़ ली है. देश में बासमती धान का रकबा करीब 1 लाख हेक्टेयर घटने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की कीमत 1,160 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है, जो पिछले साल से 15 से 20 फीसदी अधिक है. वहीं, हरियाणा की करनाल मंडी में पूसा 1509 की आवक शुरू हो गई है और किसानों को करीब 3,950 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में रकबा घटने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में कम आपूर्ति और मजबूत निर्यात मांग के चलते आगे बासमती के भाव में और मजबूती की उम्मीद है.
उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, वर्ष 2025 में बासमती धान का कुल रकबा करीब 24.9 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल लगभग 1 लाख हेक्टेयर घटकर रह गया है. इससे पहले वर्ष 2024 में यह क्षेत्र करीब 27.5 लाख हेक्टेयर था. इस तरह बासमती की खेती का क्षेत्र लगातार दूसरे साल कम हुआ है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में रकबा करीब 4 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है. इन दोनों क्षेत्रों में बासमती का उत्पादन कम होने से देश के कुल उत्पादन पर असर पड़ सकता है. पिछले खरीफ सीजन में भारत में बासमती चावल का उत्पादन करीब 1 करोड़ टन दर्ज किया गया था.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई राज्यों में बासमती का रकबा घटा है, वहीं पंजाब में किसानों ने पिछले साल के बराबर ही क्षेत्र में बासमती की बुआई की है. विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 में पंजाब में भारी बारिश और बाढ़ के कारण फसल को नुकसान हुआ था. इस बार मौसम की स्थिति बेहतर रहने पर उत्पादन में सुधार हो सकता है. इसके बावजूद उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कम रकबे के कारण कुल उत्पादन में कमी आने की आशंका बनी हुई है. इसका असर घरेलू मंडियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिल सकता है.
बासमती की खेती वाले प्रमुख जीआई राज्यों के अलावा मध्य प्रदेश में भी रकबा घटने की खबर है. कम बारिश के कारण राज्य में धान की खेती प्रभावित हुई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक मध्य प्रदेश में कुल चावल का रकबा पिछले साल की तुलना में 1.75 लाख हेक्टेयर कम रहा. वर्ष 2025 में राज्य में चावल का कुल क्षेत्र करीब 42.10 लाख हेक्टेयर था. उद्योग के अनुमान के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बासमती का रकबा 6 से 7 लाख हेक्टेयर के बीच रहता है. ऐसे में कुल क्षेत्र में आई कमी का बड़ा हिस्सा बासमती की खेती घटने से जुड़ा माना जा रहा है.
APEDA के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.52 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर रही. इस दौरान औसत निर्यात मूल्य करीब 870 डॉलर प्रति टन था. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 1.54 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात हुआ, जिसका औसत भाव 938 डॉलर प्रति टन रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की कीमत करीब 1,160 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है, जो पिछले साल से 15 से 20 प्रतिशत अधिक है. वहीं, हरियाणा की करनाल मंडी में पूसा 1509 की आवक शुरू हो गई है और किसानों को करीब 3,950 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है. व्यापारियों के अनुसार, शामली समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले बासमती की भी अच्छी मांग है. पूसा 1121 का रकबा कम होने से आगे कीमतों में और मजबूती की उम्मीद है.