एग्रीवेट: मछली पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है. ऐसे में सिक्किम के सोरेंग जिले में देश का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर विकसित किया गया है. यहां बिना हानिकारक रसायनों, एंटीबायोटिक और कीटनाशकों के मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे मछली किसानों को जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है. इस पहल के तहत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) से 3.75 करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं. साथ ही मछली उत्पादन, भंडारण और बिक्री से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर को सिक्किम के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.75 करोड़ रुपये की मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन किया. इन परियोजनाओं में मछली की हैचरी, मछली आहार बनाने की इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन की सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा बायोफ्लॉक और रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इन सुविधाओं से किसानों को मछली उत्पादन बढ़ाने और तैयार उपज को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. कार्यक्रम में मछली किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) भी दिए गए, ताकि वे अपनी जरूरतों के लिए संस्थागत कर्ज ले सकें. वहीं, पांच किसानों को आर्थिक सहायता के चेक और दो मत्स्य सहकारी समितियों के 15 सदस्यों को मछली का चारा वितरित किया गया.
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सोरेंग जिले में विकसित जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर का उद्देश्य मछली उत्पादन में रसायनों और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को रोकना है. इस क्लस्टर में मुख्य रूप से अमूर कार्प, भारतीय प्रमुख कार्प और ट्राउट मछलियों के पालन पर ध्यान दिया जाएगा. किसानों को जैविक तरीकों से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. सिक्किम पहले से ही जैविक खेती के लिए जाना जाता है. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि यहां जैविक खेती के अनुभव का फायदा मत्स्य पालन क्षेत्र को भी मिलेगा. इससे जैविक मछलियों और उनसे तैयार होने वाले उत्पादों की मांग बढ़ सकती है. किसानों को स्थानीय बाजार के साथ देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों में भी अपनी उपज बेचने के अवसर मिल सकते हैं.
जैविक मछली की गुणवत्ता और पहचान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक मत्स्य पालन के प्रमाणन से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की. इसके तहत मछली उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी. इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि मछली का उत्पादन निर्धारित जैविक मानकों के अनुसार हुआ है. साथ ही उपभोक्ताओं को भी जैविक मछली की पहचान करने में आसानी होगी. सरकार देश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम कर रही है. इसके तहत उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और बिक्री की सुविधाएं एक ही क्षेत्र में विकसित की जाती हैं. PMMSY के तहत देशभर में ऐसे 34 क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं.
सिक्किम के मछली किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ समझौता किया है. इसके तहत ITBP के संस्थानों के लिए स्थानीय किसानों से रेनबो ट्राउट मछली खरीदने की व्यवस्था की गई है. इससे ट्राउट मछली का उत्पादन करने वाले किसानों को नियमित खरीदार मिलने की उम्मीद है. इस व्यवस्था में मछली की गुणवत्ता, आपूर्ति की मात्रा, कीमत और जांच जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार तलाशने की परेशानी कम हो सकती है. सरकार का मानना है कि जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर, आधुनिक सुविधाओं और संस्थागत खरीद जैसी पहल से सिक्किम में मछली उत्पादन को नई दिशा मिलेगी. साथ ही स्थानीय किसानों की आमदनी बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने में भी मदद मिलेगी