लखनऊ में गन्ना संस्थान के बाहर राकेश टिकैत का धरना, गेट बंद होने पर जताया विरोध – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत और अन्य किसान नेताओं ने गन्ना संस्थान के बाहर धरना दिया. किसान नेता 23 अक्टूबर को होने वाली बैठक की तैयारी के लिए संस्थान पहुंचे थे, लेकिन वहां गेट बंद होने के कारण उन्हें अंदर जाने में परेशानी हुई. इसके विरोध में किसान नेताओं ने गेट के बाहर करीब दो से तीन घंटे तक प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की बैठक पहले से तय थी. वे बैठक से जुड़ा सामान परिसर के अंदर ले जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि जब तक गेट नहीं खुलेगा, किसान वहीं बैठे रहेंगे.

किसान नेताओं की प्रमुख मांगों में गन्ने का भाव बढ़ाना और किसानों का बकाया भुगतान जल्द जारी करना शामिल है. राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ना किसानों को पिछले सीजन का बकाया भी नहीं मिला है. सरकार को भुगतान जल्द कराने के लिए कदम उठाने चाहिए. इसके अलावा, किसानों ने धान खरीद केंद्रों को ठीक से चलाने और मंडियों में धान की खरीद सुचारू रूप से कराने की मांग की. टिकैत ने दावा किया कि किसानों को धान उम्मीद से करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बेचना पड़ रहा है.

किसान नेताओं ने विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया. राकेश टिकैत का आरोप है कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण मौजूदा समय में किया जा रहा है, लेकिन मुआवजे की गणना 2013 के सर्किल रेट के आधार पर की जा रही है. उन्होंने मांग की कि किसानों को जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए. इसके साथ ही बिजली से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की गई. टिकैत ने कहा कि बैठक के बाद किसानों के मुद्दों को लेकर अधिकारियों से बातचीत की जाएगी.

राकेश टिकैत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आम लोगों और किसानों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि जब किसानों की बात नहीं सुनी जाती, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें उठानी पड़ती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के लिए बैठक करना तक मुश्किल हो गया है और अधिकारी सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं.

प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रहे. किसान नेताओं ने गेट के बाहर ही बैठक करने की बात भी कही थी. हालांकि, वे परिसर में जाकर बैठक करना चाहते थे. धरने के बाद संस्थान का गेट खोल दिया गया. किसान नेताओं की मांग है कि गन्ने का उचित भाव तय किया जाए, बकाया भुगतान जल्द हो, धान खरीद व्यवस्था सुधारी जाए और जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को उचित मुआवजा मिले. (PTI)

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