एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, भोपाल: अल्प वर्षा के बीच रबी 2026-27 की तैयारी, धार में किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह – मध्यप्रदेश के धार जिले में अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए रबी 2026-27 की तैयारियों के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र, धार में उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संभाग के संयुक्त संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने की। इसमें धार अनुभाग के विकासखंड धार, तिरला, नालछा, सरदारपुर और बदनावर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी एवं कृषि विस्तार अधिकारियों सहित 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
संयुक्त संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अल्प वर्षा और अल-नीनो के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली रबी फसलों और उन्नत किस्मों के चयन के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से चना, मसूर, सरसों और चिया जैसी कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
संयुक्त संचालक कृषि ने कहा कि किसान ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही किसानों को संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जाए, ताकि मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता बेहतर बनी रहे।
उप संचालक कृषि विजय चौरसिया ने अल्प वर्षा की स्थिति में सिंचाई जल के दक्ष उपयोग के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर और मिनी स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई, ताकि सीमित जल उपलब्धता में भी फसलों को आवश्यक सिंचाई मिल सके। उन्होंने रबी मौसम में केसीसी धारक किसानों सहित पात्र ऋणी और अऋणी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा कराने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए, ताकि फसल क्षति की स्थिति में बीमा योजना का लाभ मिल सके।
परियोजना संचालक आत्मा करण सिंह झणिया ने प्राकृतिक खेती के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने इसकी तकनीकों और लाभों के साथ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।
कृषि वैज्ञानिक डी.एस. मंडलोई ने अल्प वर्षा की स्थिति में कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली सब्जी वर्गीय फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं दक्ष उपयोग के साथ परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन अपनाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम के दौरान रबी 2026-27 के लिए विकासखंडवार कम पानी में उत्पादित होने वाली फसलों, उपयुक्त बीज और उन्नत किस्मों के चयन तथा किसानों तक कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।