मंडला: प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़तीं प्रभा टेकाम – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: 19 सितंबर 2026, मंडला: मंडला: प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़तीं प्रभा टेकाम – मंडला जिले के विकासखंड बीजाडांडी के ग्राम धनवाही की सीमांत महिला कृषक श्रीमती प्रभा तेकाम ने सीमित संसाधनों को अपनी ताकत बनाकर खेती में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

तीन एकड़ कृषि भूमि की स्वामिनी प्रभा ने करीब पांच वर्ष पहले प्राकृतिक खेती को अपनाने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया । अपनी दो एकड़ भूमि को उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुक्त कर प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित किया।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं आत्मा योजना के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि आदान स्वयं तैयार करना सीखा। घर पर ही बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर और जीवामृत इकाई स्थापित कर उन्होंने बाजार से कृषि आदान खरीदने की निर्भरता कम की।

धान, मक्का, अरहर, कोदो-कुटकी से लेकर गेहूं, चना, मटर और सब्जियों तक फसल विविधीकरण अपनाकर प्रभा ने अपनी खेती को वर्षभर आय का साधन बनाया। पारंपरिक बीजों का संरक्षण और खेत में पराली व कृषि अवशेषों का उपयोग उनकी प्राकृतिक खेती को और मजबूत बनाता है।  इस बदलाव का असर उनकी आमदनी पर भी दिखाई दिया। वार्षिक शुद्ध आय लगभग 30 हजार रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये हुई, जबकि कृषि लागत में करीब 60 प्रतिशत तक कमी आई। मृदा परीक्षण में जैविक कार्बन और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार भी देखा गया।

लेकिन प्रभा की सफलता की असली खूबसूरती यह है कि उन्होंने अपनी सीख को अपने तक सीमित नहीं रखा। 8 प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट से मिले ज्ञान को वह गांव की दूसरी महिलाओं और किसानों तक पहुंचा रही हैं। स्व-सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन से जुड़कर वह महिलाओं को प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही हैं।   तीन एकड़ की जमीन से शुरू हुई यह यात्रा अब कई महिलाओं के लिए उम्मीद बन रही है। प्रभा तेकाम की कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास की कहानी है, जिसने सीमित साधनों को अवसर में बदला और अपनी मेहनत से दूसरों के लिए राह बनाई।

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