एग्रीवेट: 26 सितंबर 2026, इंदौर कृषक जगत ) ( विशेष संवाददाता ): फसल नुकसान के पंचनामे पर सूचना आयोग सख्त, 25 हजार जुर्माना – अपने हक़ के लिए किसानों में जागरूकता होना ज़रूरी है, क्योंकि सरकारी कर्मचारी जब नकारात्मकता के साथ कोई कार्य करते हैं ,तो उसके नतीज़े किसानों के हित में कभी नहीं आते हैं, बल्कि उन्हें हासिल करने के लिए ज़द्दोज़हद करनी पड़ती है। पांढुर्ना के किसान श्री मंसाराम खोड़े का मामला भी ऐसा ही है , जिसमें उन्होंने जब अपनी फसल नुकसानी के पंचनामों की जानकारी राजस्व विभाग से मांगी, तो देना तो दूर उन्हें गायब बता दिया। सूचना के अधिकार के तहत प्रथम अपील में लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर राज्य सूचना आयुक्त , भोपाल में द्वितीय अपील की गई , जिसमें राज्य सूचना आयुक्त श्री ओंकार नाथ ने सख्त आदेश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि किसान श्री मंसाराम खोड़े ने अपने आवेदन में 4 फरवरी 2023, 16 मार्च 2023 और 18 अप्रैल 2023 को खेत में हुए फसल नुकसान से संबंधित पंचनामा प्रतिवेदनों की प्रतियां मांगी थीं। किसान के अनुसार इन तीनों अवसरों पर खेत में फसल नुकसान की जांच की गई थी और पंचनामे तैयार किए गए थे। हालांकि, सूचना मांगने पर उन्हें केवल 18 अप्रैल 2023 के पंचनामे की जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि 4 फरवरी और 16 मार्च 2023 के पंचनामे उपलब्ध नहीं कराए गए। किसान ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि संबंधित अधिकारियों ने खेत का निरीक्षण किया था और पंचनामा तैयार किया गया था। उन्होंने इन दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने के साथ ही रिकॉर्ड में हुई कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की थी।
आयोग ने दिखाई सख्ती – मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद राज्य सूचना आयोग ने माना कि किसान द्वारा मांगी गई जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रकट किए जाने योग्य है। आयोग ने मामले को केवल जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संबंधित फसल नुकसान पंचनामों की उपलब्धता और उनके रिकॉर्ड की स्थिति की जांच कराने के निर्देश दिए। आयोग ने कलेक्टर, जिला पांढुर्ना को निर्देशित किया है कि सक्षम अधिकारी से मामले के तथ्यों की जांच कराई जाए। यदि 4 फरवरी 2023 और 16 मार्च 2023 के फसल नुकसान पंचनामा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हों ,तो उनकी प्रमाणित प्रतियां किसान को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। यदि ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी अनुपलब्धता के लिए जिम्मेदार अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयोग ने तत्कालीन तहसीलदार एवं लोक सूचना अधिकारी श्री वीर बहादुर सिंह धुर्वे के ऊपर कड़ा रुख अपनाते हुए ₹25,000 की शास्ति अधिरोपित करने तथा धारा 20(2) के तहत कारण बताओ सूचना-पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए । आयोग ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जांच और कार्रवाई की पालन रिपोर्ट आयोग तथा अपीलार्थी को उपलब्ध कराई जाए। मामले की व्यक्तिगत सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को प्रातः 11 बजे निर्धारित की गई है।
किसानों के लिए अहम बना आयोग का आदेश – राज्य सूचना आयोग का यह आदेश किसानों के लिए अहम है। फसल नुकसान के पंचनामे, सर्वे रिपोर्ट और अन्य सरकारी अभिलेख किसान के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इन्हीं अभिलेखों के आधार पर कई मामलों में फसल नुकसान, राहत और अन्य शासकीय प्रक्रियाओं से जुड़े दावे आगे बढ़ते हैं। ऐसे में यदि किसान को उसके खेत से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वह सूचना के अधिकार अधिनियम का उपयोग कर संबंधित दस्तावेज मांग सकता है और ज़रूरत पड़ने पर प्रथम अपील तथा सूचना आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है।
सरकारी तंत्र में मज़बूत होगी जवाबदेही – इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त श्री ओंकार नाथ द्वारा केवल सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश देने के बजाय रिकॉर्ड की जांच, जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश देना सरकारी तंत्र में जवाबदेही मजबूत करने वाला कदम है। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकारी अभिलेखों के रख-रखाव और सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।