चीनी कीमतों में भारी उछाल ने चिंता बढ़ाई, स्टॉक लिमिट लगने के बाद भी 25 फीसदी चढ़े दाम – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: त्योहारी सीजन को देखते हुए हिमाचल सरकार ने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विक्रेताओं और स्टॉक को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं. इससे पहले केंद्र सरकार भी स्टॉक लिमिट घटा चुकी है ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे और जमाखोरी पर अंकुश लगाया जा सके. हिमाचल के बिलासपुर की जिला खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक शीतल शर्मा ने कहा कि नए दिशानिर्देश जारी किए हैं.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के जरूरी वस्तुओं की मूल्य निगरानी समित ने चीनी के ताजा रिटेल प्राइस जारी किए हैं. अखिल भारतीय स्तर पर चीनी का खुदरा भाव 58.03 रुपये प्रति किलो है. यह दाम बीते साल की तुलना में लगभग 12 रुपये अभी ऊपर बना हुआ है. 21 अक्तूबर 2025 को चीनी का खुदरा भाव 46.58 रुपये प्रति किलो था. वहीं, चीनी की थोक कीमत 5307.91 रुपये प्रति क्विंटल है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में 25 फीसदी से अधिक है.

त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग के बीच जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में व्यापारियों के लिए चीनी भंडारण की सीमा 50 फीसदी घटाकर 2,000 क्विंटल से 1,000 क्विंटल कर दी गई है. बिलासपुर की जिला नियंत्रक (खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले) शीतल शर्मा ने कहा कि उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत देशभर में चीनी के भंडारण की सीमा में संशोधन किया गया है. संशोधित प्रावधान 15 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गए हैं.

शीतल शर्मा ने कहा कि चीनी कारोबार करने वाले सभी थोक व्यापारियों को इन आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं. नए आदेशों के तहत व्यापारी अब अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी का भंडारण कर सकते हैं. पहले यह सीमा 2,000 क्विंटल थी। इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी रोकना और निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण पर निगरानी रखना है.

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने जिले के सभी चीनी विक्रेताओं, व्यापारियों और थोक कारोबारियों को निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार खाद् भंडार निगरानी पोर्टल पर चीनी के भंडार का ब्योरा नियमित रूप से अद्यतन करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा विभाग के निरीक्षकों को निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं.

चीनी की कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजार उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को और सख्त किया है. ताजा फैसले के अनुसार चीनी व्यापारी के लिए चीनी स्टॉक अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है और स्टॉक रखने की सीमा 1,000 क्विंटल निर्धारित की गई है. केंद्र का यह निर्देश आज 15 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी.

चीनी व्यापारियों के लिए नए मानकों के तहत चीनी का स्टॉक मिलने की तारीख से 15 दिनों से अधिक समय तक चीनी को रोकने की मनाही है. इसके अलावा देश भर में किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं.

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान के अनुसार कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों और असम राज्य में यह ताजा फैसला लागू नहीं किया गया है. इन क्षेत्रों के चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 2,000 क्विंटल निर्धारित की गई है. बता दें कि कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और इसे देश के पूर्वी हिस्से, जिसमें उत्तर-पूर्वी क्षेत्र भी शामिल है को आपूर्ति करता है. असम के लिए ऊपरी सीमा भौगोलिक बाधाओं, परिवहन व्यवस्था और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में उपभोक्ताओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है.

संशोधित नियमों का उद्देश्य यह पक्का करना है कि सप्लाई में चीनी का अनावश्यक स्टॉक न हो और चीनी मिलों से डीलरों के जरिए अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति ठीक से हो सके. यह उपाय विशेष रूप से जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा चीनी के भंडार में जमाखोरी को रोकने के लिए है. चीनी की मात्रा और भंडारण अवधि को सीमित कर सरकार आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से चीनी की व्यवस्थित आवाजाही को सुगम बनाना चाहती है और उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर इसकी निरंतर उपलब्धता पक्का करना चाहती है.

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