एग्रीवेट: Gujarat News: गुजरात में बारिश की कमी अब किसानों की चिंता बढ़ा रही है. खेतों में खरीफ की फसलें खड़ी हैं, लेकिन अक्टूबर में बारिश नहीं होने से उनकी सिंचाई का संकट गहराने लगा है. ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बांध से पानी छोड़ने का फैसला किया है. खेड़ा और आणंद जिले के किसानों को इससे खास मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार कडाणा बांध से पानी छोड़कर करीब 80 हजार हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाएगी.
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 10 अक्टूबर से कडाणा बांध से 5,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मंजूरी दी है. बिडनेसलाइन के अनुसार, इसके तहत कुल 19.8 करोड़ घन मीटर पानी छोड़ा जाएगा. इससे माही कमांड क्षेत्र में आने वाले खेड़ा और आणंद जिलों की करीब 80 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलों की सिंचाई की जा सकेगी. राज्य सरकार के मुताबिक, इस फैसले का मकसद बारिश की कमी के बीच किसानों की फसलों को बचाना है.
इस साल गुजरात में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा है. 1 जून से 10 अक्टूबर के बीच राज्य में 810 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस दौरान औसतन करीब 910 मिलीमीटर बारिश होती है. यानी बारिश में लगभग 11 फीसदी की कमी रही. पिछले साल इसी दौरान 975 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. अक्टूबर में हालात और चिंताजनक रहे. 1 से 10 अक्टूबर के बीच राज्य में सिर्फ 0.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर करीब 11 मिलीमीटर बारिश होती है. इतनी कम बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलों को पानी की जरूरत बढ़ गई है.
खेड़ा और आणंद जिले खेती के लिहाज से अहम हैं. इस खरीफ सीजन में दोनों जिलों में करीब 3.8 लाख हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हुई है. इनमें धान, सब्जियां और तंबाकू प्रमुख फसलें हैं. दोनों जिलों में लगभग 2.37 लाख हेक्टेयर में धान उगाया गया है. यह गुजरात में धान की कुल खेती का करीब एक चौथाई हिस्सा है.
इसके अलावा 34,900 हेक्टेयर में सब्जियां और 29,000 हेक्टेयर में तंबाकू की खेती हुई है. राज्य में तंबाकू की कुल खेती का करीब 77 फीसदी हिस्सा इन्हीं दो जिलों में है. ऐसे में बांध से पानी छोड़े जाने पर उन किसानों को राहत मिल सकती है, जिनकी फसलों को इस समय सिंचाई की जरूरत है.
बारिश की कमी का असर सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है. इस खरीफ सीजन में गुजरात में कुल 83.42 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जबकि पिछले तीन साल का औसत 85.53 लाख हेक्टेयर है. तिल की बुवाई में करीब 59 फीसदी की गिरावट आई और इसका क्षेत्र घटकर 20,348 हेक्टेयर रह गया. वहीं, मूंग की बुवाई करीब 32 फीसदी घटकर 32,857 हेक्टेयर पर आ गई. ग्वार की बुवाई में भी लगभग 40 फीसदी की कमी दर्ज की गई.
बारिश की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने सितंबर में भी सिंचाई और जल आपूर्ति बढ़ाने के फैसले किए थे. उस समय माही कमांड क्षेत्र में 20 दिनों के लिए 5,000 क्यूसेक नर्मदा जल देने की मंजूरी दी गई थी. इसके अलावा साउनी योजना के जरिए देवभूमि द्वारका और जामनगर में पानी की आपूर्ति 10 दिन बढ़ाई गई थी. उत्तर गुजरात में सुजलाम-सुफलाम पाइपलाइन से पानी देने की अवधि भी बढ़ाई गई थी. अब कडाणा बांध से पानी छोड़ने के फैसले से किसानों को अपनी खड़ी फसलों की सिंचाई में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, फसलों को कितनी राहत मिलेगी, यह पानी की उपलब्धता और खेतों तक उसकी पहुंच पर भी निर्भर करेगा.