एग्रीवेट: 07 अक्टूबर 2026, डिंडोरी: डिंडोरी : धान एवं अन्य फसलों के लिए कृषि विभाग ने किसानों को दी सलाह – जिले में धान की फसल में भूरा फुदका, सफेद फुदका, सोयाबीन में पीला मोजेक एवं सफेद फुदका तथा रामतिल में अमरबेल के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने तथा समय पर कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने बताया कि फुदका, अमरबेल एवं पीला मोजेक के प्रकोप से धान, सोयाबीन एवं रामतिल की पत्तियां पीली पड़ने के साथ फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
कृषि विभाग के अनुसार प्रकोप दिखाई देने पर अनुशंसित कीटनाशकों का 150 से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। धान में भूरा एवं सफेद फुदका के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 60 मिली अथवा थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 80 ग्राम अथवा पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 120 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है। सोयाबीन में पीला मोजेक एवं सफेद फुदका के लिए नीम ऑयल 1500 पीपीएम 166.66 मिली, थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 80 ग्राम, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 33 मिली अथवा इमेजापायर 10 प्रतिशत एसएल 145 मिली प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा बताई गई है। रामतिल में अमरबेल के नियंत्रण के लिए नीम ऑयल 1500 पीपीएम 166.66 मिली अथवा पेंडीमेथलीन 30 ईसी 80 एमएल प्रति एकड़ का उपयोग किया जा सकता है।
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि फुदका के प्रकोप के दौरान नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, जैसे यूरिया, का अनावश्यक प्रयोग न करें। कीटनाशक का छिड़काव करते समय खेत में पानी का स्तर कम रखें तथा दवा का घोल पौधों के निचले तने एवं पत्तियों के आधार तक पहुंचाएं, क्योंकि फुदका प्रायः इन्हीं स्थानों पर पाया जाता है। साथ ही कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानी बरतते हुए एक ही रासायनिक समूह की दवा का बार-बार उपयोग न करने की सलाह दी गई है,जिससे कीटों में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की संभावना को कम किया जा सके।