एग्रीवेट: त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने खाद्य तेल कंपनियों से खुदरा कीमतें कम करने की अपील की है. एसोसिएशन ने कंपनियों से खाद्य तेलों के खुदरा दाम की जानकारी हर सप्ताह सरकार को देने को भी कहा है. यह अपील सरकार के 24 सितंबर 2026 से प्रमुख आयातित खाद्य तेलों पर कस्टम ड्यूटी घटाने के फैसले के बाद की गई है. IVPA के मुताबिक, ड्यूटी में कटौती से नेपाल के रास्ते होने वाले आयात में कीमत का अंतर कम हो सकता है. इससे आयात में आई तेजी को नियंत्रित करने और घरेलू आयातकों व रिफाइनर्स के बीच बेहतर प्रतिस्पर्धा बनाने में मदद मिलेगी.
एसोसिएशन ने कहा कि ड्यूटी घटने से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है. साथ ही इससे खाद्य तेल बाजार में पारदर्शिता, उचित प्रतिस्पर्धा और कीमतों में स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. वहीं, IVPA के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने बिजनेसलाइन से कहा कि सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाकर सही समय पर कदम उठाया है. त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है, ऐसे में इस फैसले से ग्राहकों को राहत मिल सकती है. उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. इसकी वजह भू-राजनीतिक तनाव, मौसम से जुड़ी समस्याएं और खाद्य तेलों का ज्यादा इस्तेमाल बायोफ्यूल बनाने में होना है. इससे घरेलू महंगाई का दबाव बढ़ा है और परिवारों के बजट पर भी असर पड़ा है.
देसाई ने बताया कि IVPA ने अपने सदस्यों से कहा है कि आयात शुल्क में कटौती का फायदा खुदरा कीमतें घटाकर ग्राहकों तक पहुंचाएं. साथ ही कंपनियों से हर सप्ताह अपनी खुदरा कीमतों की सूची सरकार को देने को कहा गया है. उनके मुताबिक, इससे खाद्य तेलों की कीमतों पर नजर रखने में मदद मिलेगी और यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकार के फैसले का फायदा समय पर ग्राहकों तक पहुंचे.
IVPA के मुताबिक, पिछले 6 से 12 महीनों में वैश्विक खाद्य तेल बाजार में कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. भारत में भी महंगाई का दबाव लगातार बढ़ा है. अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.8 फीसदी तक पहुंच गई थी. इस दौरान कुछ खाद्य तेलों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई. एसोसिएशन ने कहा कि त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती का महत्व और बढ़ गया है. त्योहारों के दौरान घरों के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग, मिठाई, स्नैक्स और होटल-रेस्तरां कारोबार में खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है. IVPA के अनुसार, आयात लागत कम होने से खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव घट सकता है. इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ बाजार में मांग और खपत को भी बढ़ावा मिल सकता है.