​गांव के विकास का काम रुकने नहीं देंगे, शिवराज सिंह की नसीहत चिट्ठी-चिट्ठी खेलना बंद करें अफसर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ​गांव की पगडंडियों से ही होकर विकसित भारत का रास्ता जाता है. इसलिए गांवों के विकास कार्यों में अफसर ढीलाढाली ना करें. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सड़क आदि निर्माण कार्यों के लिए चिट्ठी चिट्ठी का खेल खेलना बंद करें और व्यवहारिक समाधान, नवाचार से गांवों की तस्वीर बदलने का काम करें. उन्होंने कहा कि 8.50 लाख किलोमीटर सड़कों से गांवों की तस्वीर बदली है. हमें अब चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर सड़क निर्माण के नए संकल्प को पूरा करने पर जुटना है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में अधिकारियों और अभियंताओं से कहा कि वे इस चिंतन शिविर को केवल औपचारिक “कर्मकांड” न रहने दें, बल्कि धरातल पर आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों के ठोस और नवाचारपूर्ण समाधान खोजें. उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएमजीएसवाई का अगला चरण केवल सामान्य निर्माण का नहीं, बल्कि ‘क्वालिटी कनेक्टिविटी’ का होना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूज्य बापू ने कहा था कि विकसित भारत का रास्ता खेतों की पगडंडी और गांव की गलियों से होकर जाता है. जब तक गांव का विकास नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास अधूरा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देश के ग्रामीण जनजीवन और अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. अब तक देश में करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं. उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के चौथे चरण (PMGSY-IV) में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य मिला है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति हो चुकी है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करना है.

वन एवं पर्यावरण अनुमतियों (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) में होने वाली देरी पर उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल औपचारिकता के लिए चिट्ठी लिखकर बैठ जाना समाधान नहीं है. उन्होंने कहा, “चिट्ठी-दर-चिट्ठी का खेल नहीं चलेगा. मन में तड़प होनी चाहिए कि काम कैसे तेजी से हो. अधिकारी सीधे पर्यावरण विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ बैठकर लंबित मामलों का एकमुश्त निस्तारण कराएं.

उन्होंने बदलते मौसम, बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विविधताओं से भरा है, इसलिए हर राज्य और भौगोलिक क्षेत्र के लिए एक जैसा इंजीनियरिंग मॉडल (वन साइज फिट्स ऑल) लागू नहीं किया जा सकता. डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी (ड्रेनेज), पुलिया और जलभराव की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि यदि सड़क बन जाए और पानी निकासी न होने से ग्रामीणों के घरों में पानी भरे, तो ऐसी सड़क का कोई अर्थ नहीं है. सड़क के साथ ही पुलिया, मजबूत ड्रेनेज और पौधरोपण सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

गुणवत्ता नियंत्रण पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यदि कोई एजेंसी घटिया निर्माण करती है तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और यह भी निगरानी रखी जाए कि वही ठेकेदार किसी दूसरे या रिश्तेदार के नाम से नई कंपनी बनाकर काम में न घुस पाए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे केवल दफ्तरों या हवाई दौरों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर धरातल पर औचक निरीक्षण करें।

​उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जो राज्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ काम पूरा करेंगे, उन्हें आगामी स्वीकृतियों में वरीयता (वेटेज) दी जाएगी और उनके लिए एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अपनी कार्यशैली सुधारनी होगी.

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