कीट नियंत्रण के लिए किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 01 अक्टूबर2026, पटना: कीट नियंत्रण के लिए किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान – बिहार में फसलों को हानिकारक कीटों के प्रकोप से बचाने और रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को कम करने के लिए कृषि विभाग ने विशेष पहल शुरू की है। चालू वित्तीय वर्ष में ‘पौध संरक्षण से संबंधित उपादान वितरण योजना’ का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को जैविक एवं सुरक्षित कीट नियंत्रण उपकरणों की खरीद पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करने के साथ खेती में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कीट नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देना है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, योजना के तहत किसानों को फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन उपकरणों का उपयोग धान, मक्का, टमाटर, बैंगन, विभिन्न सब्जियों और अमरूद जैसे फलदार पौधों में कीटों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए किया जा सकता है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की पहचान और नियंत्रण में मदद मिलेगी तथा रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकेगी।अलग-अलग फसलों के लिए अलग सहायता

योजना के तहत फसल और कीट के अनुसार अनुदान राशि निर्धारित की गई है। धान में तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 96 रुपए प्रति सेट अथवा अधिकतम 480 रुपए प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा। मक्का में फॉल आर्मी वर्म नियंत्रण के लिए 162 रुपए प्रति सेट अथवा 810 रुपए प्रति एकड़, जबकि टॉप बोरर एवं सुंडी नियंत्रण के लिए 108 रुपए प्रति सेट अथवा 540 रुपए प्रति एकड़ की सहायता निर्धारित है।

टमाटर में लीफ माइनर कीट नियंत्रण के लिए 177 रुपए प्रति सेट अथवा अधिकतम 885 रुपए प्रति एकड़ अनुदान मिलेगा। सब्जियों में डायमंड बैक माथ से बचाव के लिए 171 रुपए प्रति सेट अथवा अधिकतम 855 रुपए प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी। विभिन्न फसलों में रसचूसक कीटों के नियंत्रण के लिए स्टिकी ट्रैप पर 30 रुपए प्रति सेट अथवा अधिकतम 360 रुपए प्रति एकड़ अनुदान का प्रावधान है।

सामान्य क्षेत्रों में एक किसान को अधिकतम पांच एकड़ भूमि तक के लिए योजना का लाभ दिया जाएगा। वहीं विशेष टाल क्षेत्रों में किसानों के लिए यह सीमा अधिक रखी गई है। पटना, नालंदा, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और मुंगेर जिलों के टाल क्षेत्र के किसान अधिकतम 10 एकड़ तक की खेती के लिए उपादान खरीद पर अनुदान प्राप्त कर सकेंगे।ऑनलाइन आवेदन जरूरी

योजना का लाभ लेने के लिए किसान का कृषि विभाग के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद किसान पौध संरक्षण सेवा के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

किसानों को आवेदन करते समय मांगी गई जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करने की सलाह दी गई है। योजना की पात्रता, उपलब्ध लक्ष्य और संबंधित उपादानों की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त की जा सकती है। योजना के माध्यम से फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप जैसे उपकरण किसानों की पहुंच में लाकर कीटों के प्रभावी नियंत्रण के साथ रासायनिक कीटनाशकों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे खेती की लागत घटाने और सुरक्षित कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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