अनुमान आधारित खेती से डेटा आधारित स्मार्ट कृषि की ओर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: लेखक- जितेंद्र श्रीकांत झंवर, मीडिया विभाग, जैन इरिगेशन, जळगाव

28 सितंबर 2026, नई दिल्ली: अनुमान आधारित खेती से डेटा आधारित स्मार्ट कृषि की ओर – भारतीय कृषि के सामने जल प्रबंधन आज एक बड़ी चुनौती है। बारिश कभी समय पर तो कभी बेमौसम, कभी अत्यधिक वर्षा तो कभी लंबे समय तक बारिश का अभाव ऐसे बदलते मौसम में फसल को कितना पानी देना है, कब देना है और कब पानी देने से बचना है, यह तय करना किसान के लिए कई बार अनुमान पर आधारित निर्णय बन जाता है। हालांकि, आधुनिक तकनीक ने इस स्थिति को बदलने की दिशा दिखाई है।

‘जैन इरिगेशन’ का ‘जैन लॉजिक’ ऑटोमेशन इसी दिशा में विकसित की गई एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली है। यह केवल पंप या वाल्व को अपने आप चालू-बंद करने वाली प्रणाली नहीं है; बल्कि मिट्टी की नमी, मौसम, बारिश की संभावना, फसल की पानी की आवश्यकता और सिंचाई से संबंधित जानकारी जैसे विभिन्न घटकों के डेटा को एकत्रित करके सिंचाई प्रबंधन को निर्णय आधारित बनाने वाली प्रणाली है। जैन लॉजिक में सेंसर, मॉनिटरिंग एवं कंट्रोल उपकरण, सॉफ्टवेयर, रियल-टाइम विश्लेषण और निर्णय-सहायता प्रदान करने वाले विश्लेषण का समावेश है।

इसके पीछे की अवधारणा सरल है। फसल को जब जरूरत हो, तभी और जरूरत के मुताबिक पानी देना। इस प्रणाली में जड़ों के आसपास की मिट्टी की नमी को सेंसर के माध्यम से मापा जाता है। यह जानकारी डिजिटल माध्यम से प्रणाली तक पहुंचती है और उपलब्ध डेटा के आधार पर सिंचाई की योजना बनाई जा सकती है। मौसम का पूर्वानुमान और बारिश से संबंधित जानकारी भी इस निर्णय प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती है।

अर्थात, किसान का निर्णय केवल “आज पानी देना है या नहीं?” तक सीमित नहीं रहता, बल्कि “फसल की जड़ों के आसपास इस समय कितनी नमी है, आने वाले समय में कितने पानी की आवश्यकता हो सकती है और उपलब्ध मौसम की परिस्थितियों में सिंचाई की योजना किस प्रकार बनाई जाए?” जैसे अधिक सटीक प्रश्नों की ओर खेती आगे बढ़ती है। इसे अनुमान आधारित सिंचाई से सूचना और तकनीक आधारित स्मार्ट सिंचाई की ओर बढ़ता हुआ सफर कहा जा सकता है।

1.निरीक्षण (Monitoring)- खेत में लगाए गए सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान, हवा की गति और सूर्यप्रकाश की रियल-टाइम जानकारी प्राप्त करते हैं।2. विश्लेषण (Analysis)- यह डेटा क्लाउड सर्वर पर भेजा जाता है, जहां फसल के प्रकार के अनुसार पानी की आवश्यकता का गणित तैयार किया जाता है।3. कार्रवाई (Action)- निर्धारित समय के अनुसार ऑटोमेशन के माध्यम से पानी के वाल्व और पंप अपने आप चालू या बंद होते हैं।

खेती अब केवल अनुभव पर आधारित नहीं, बल्कि ‘डेटा’ पर आधारित होना आवश्यक है। इसी कारण जैन इरिगेशन की ऑटोमेशन तकनीक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनती है। यदि हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकना है और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना है, तो ऐसे ‘स्मार्ट’ ऑटोमेशन को अपनाना समय की आवश्यकता है।

1. सिंचाई के समय पर आधारित (Time Based)- यह प्रणाली पहले से निर्धारित समय (Time Schedule) के अनुसार संचालित होती है। उदाहरण के लिए, रोज सुबह 8 से 10 बजे तक पानी देना।

2. सिंचाई की मात्रा पर आधारित (Volumetric Based)- यह प्रणाली फसल की पानी की आवश्यकता या पानी के निर्धारित वॉल्यूम के अनुसार संचालित होती है। इसमें समय की तुलना में ‘कितने लीटर पानी देना है’ इसे अधिक महत्व दिया जाता है।

ओपन लूप यानी मैनुअल कंट्रोल सिस्टम में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करने के लिए मानवीय हस्तक्षेप या बाहर से निर्देश देने की आवश्यकता होती है। इस पद्धति में किसान केवल यह तय करता है कि क्या करना है और उसके नियम क्या होंगे। लेकिन वास्तव में कब और कितना करना है, यह मशीन अपने लॉजिक के आधार पर तय करती है। यही ‘जैन लॉजिक’ की वास्तविक विशेषता है।

कंट्रोलर (Controller)- कंट्रोलर को ऑटोमेशन का ‘हृदय’ कहा जा सकता है। यह पूरी प्रणाली के कामकाज में समन्वय स्थापित करता है। खेत के विभिन्न हिस्सों में पानी की मात्रा के अनुसार प्रणाली को संचालित करने के लिए कंट्रोलर में प्रोग्रामिंग की जाती है। कुछ उन्नत मामलों में कंट्रोलर को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सेंसर का उपयोग किया जाता है।

फ्लो सेंसर / स्वचालित वॉटर मीटर-इन उपकरणों की आवश्यकता मुख्य रूप से वॉल्यूम आधारित सिंचाई प्रणाली में होती है। सिंचाई के लिए कितनी मात्रा में पानी चाहिए, यह इन उपकरणों की सहायता से निर्धारित किया जा सकता है।

जिस तरह घर की ऑटोमैटिक वॉशिंग मशीन स्वयं काम करती है, उसी तरह जैन ऑटोमेशन प्रणाली खेत में सिंचाई की पूरी योजना और नियंत्रण को स्वचालित रूप से संचालित करती है। उचित समय पर, उचित मात्रा में और फसल की आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराकर यह प्रणाली खेती को अधिक प्रभावी बनाती है।

आज की खेती केवल बुवाई, सिंचाई और कटाई तक सीमित नहीं रही है। आधुनिक खेती तकनीक, विज्ञान, डेटा विश्लेषण और सटीक प्रबंधन का प्रभावी एकीकरण बन चुकी है। मौसम में बदलाव, पानी की बढ़ती कमी, श्रमिकों की कमी और उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियों के कारण किसानों को स्मार्ट समाधानों की आवश्यकता महसूस हो रही है।

भारत की वर्तमान कृषि परिस्थितियों को देखते हुए, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के साथ ऑटोमेशन का उपयोग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खेतों में मनुष्यबल की कमी हर जगह महसूस की जा रही है। ऐसे में यह प्रणाली किसानों को कम श्रम, कम पानी और अधिक सटीकता के साथ सिंचाई प्रबंधन करने की क्षमता देती है। इसके परिणामस्वरूप पानी की बचत होती है, उर्वरकों का प्रभावी उपयोग होता है, श्रम लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। इसी पृष्ठभूमि में जैन ऑटोमेशन प्रणाली आधुनिक, स्मार्ट और टिकाऊ खेती की दिशा में एक प्रभावी कदम बन रही है।

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