एग्रीवेट: Maharashtra Drought: महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए राहत की मांग तेज हो गई है. राज्य सरकार ने 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है. इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण लोगों के लिए तत्काल राहत की मांग की है. पवार ने सरकार के सामने कुल 17 मांगें रखी हैं. इनमें किसानों के कर्ज और कृषि बिजली बिल माफ करने से लेकर फसल नुकसान पर प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की मदद देने तक की मांग शामिल है.
शरद पवार ने सूखा प्रभावित किसानों के कृषि और उससे जुड़े कर्ज माफ करने की मांग की है. इसमें सहकारी बैंकों और पब्लिक सेक्टर बैंक से लिए गए कर्ज के साथ कुछ अन्य कर्ज को भी शामिल करने की मांग है. इसके अलावा किसानों के जमीन के राजस्व और कृषि पंपों के बिजली बिल माफ करने की बात कही गई है. पवार ने यह भी मांग की है कि सूखे की वजह से जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उन्हें सीधे आर्थिक मदद दी जाए. उनकी मांग के मुताबिक किसानों को फसल नुकसान के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की सहायता दी जानी चाहिए. फलबाग, केला, गन्ना और धान जैसी फसलों को हुए नुकसान के लिए भी अलग से मदद देने की मांग की गई है.
सूखे का असर सिर्फ खेती करने वाले किसानों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि खेतों में काम करने वाले मजदूरों की कमाई पर भी असर पड़ता है. इसे देखते हुए पवार ने खेत मजदूर परिवारों को 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की है. इसके साथ ही सूखा प्रभावित किसान और खेत मजदूर परिवारों को हर महीने 25 किलो मुफ्त अनाज देने की मांग भी रखी गई है. इससे उन परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल सकती है.
सूखे की स्थिति में गांवों में पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी की समस्या बढ़ सकती है. पवार ने ऐसे इलाकों में तुरंत पानी की व्यवस्था करने की मांग की है. फलबागों को बचाने के लिए टैंकर से पानी पहुंचाने की मांग भी की गई है. इसके अलावा पशुओं के चारे के लिए सीधे बैंक खाते में सहायता देने की बात कही गई है. जल संरक्षण के अधूरे काम जल्द शुरू करने और इसके लिए अलग से पैसा देने की मांग भी पत्र में शामिल है.
पवार ने सूखा प्रभावित इलाकों में रोजगार गारंटी के काम तेजी से शुरू करने की मांग की है. उनका कहना है कि ऐसे कामों से ग्रामीण लोगों को रोजगार मिलेगा और जल संरक्षण से जुड़े काम भी आगे बढ़ सकेंगे. उन्होंने रोजगार गारंटी के काम गांवों के आसपास ही उपलब्ध कराने में राहत देने की मांग की है, ताकि लोगों को काम के लिए दूर न जाना पड़े.
सूखे की मार परिवार की कमाई पर पड़ती है तो बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो सकता है. इसी वजह से पवार ने सूखा प्रभावित परिवारों के विद्यार्थियों की स्कूल और कॉलेज फीस माफ करने की मांग की है. इसके साथ ही छात्रावास और मेस की फीस में भी राहत देने की मांग रखी गई है. यानी राहत का दायरा सिर्फ खेत और फसल तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण परिवारों की दूसरी जरूरतों तक बढ़ाने की मांग की गई है.
शरद पवार ने सरकार से कहा है कि किसानों और खेत मजदूरों को दशहरा और दिवाली से पहले आर्थिक मदद मिलनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिन का खास सेशन बुलाने की मांग भी की है. इस बीच पवार ने 28 सितंबर से सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. वह किसानों से मिलकर फसल नुकसान और जमीनी स्थिति की जानकारी लेने वाले हैं. राज्य सरकार ने 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित करने के बाद फसल नुकसान का जायजा लेने के लिए जिला प्रशासन को प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में अब सरकार की ओर से राहत उपायों पर आगे क्या फैसला लिया जाता है, इस पर किसानों की नजर है.