एग्रीवेट: Sugarcane Crushing: महाराष्ट्र में इस साल गन्ने की पेराई सामान्य समय से करीब 15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी है. 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने के फैसले का मकसद त्योहारी सीजन से पहले बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाना है. लेकिन इस फैसले को लेकर किसान संगठनों और चीनी मिलों ने चिंता जताई है. किसानों का दावा है कि गन्ना पूरी तरह पकने से पहले काटने पर उन्हें प्रति एकड़ करीब 40 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है. वहीं, मिलों का कहना है कि जल्दी पेराई से चीनी की रिकवरी भी कम हो सकती है.
अगस्त में चीनी की कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात करने का फैसला लिया. साथ ही महाराष्ट्र जैसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों को अक्टूबर से ही पेराई शुरू करने को कहा गया है. इसका उद्देश्य नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले दिवाली त्योहार से पहले बाजार में नई चीनी का स्टॉक पहुंचाना है. इसी वजह से महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी की जा रही है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि गन्ने को पूरी तरह तैयार होने से पहले काटने पर उसका वजन कम रहता है. इससे किसानों को प्रति टन करीब 450 रुपये से 500 रुपये तक का नुकसान हो सकता है. शेट्टी के मुताबिक, इसका असर एक एकड़ में करीब 40 हजार रुपये तक पहुंच सकता है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि अगर जल्दी गन्ना कटाई के कारण किसानों को नुकसान होता है तो उन्हें मुआवजा दिया जाए.
जल्दी पेराई से सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि चीनी मिलों को भी नुकसान होने की आशंका है. महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज फेडरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष पी.आर. पाटिल के अनुसार, 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने पर गन्ने से चीनी की रिकवरी करीब 1 प्रतिशत कम हो सकती है. इसका मतलब है कि एक टन गन्ने से मिलों को करीब 10 किलो कम चीनी मिलेगी. चीनी की औसत बिक्री कीमत 37 रुपये से 40 रुपये प्रति किलो मानें तो मिलों को प्रति टन करीब 370 रुपये से 400 रुपये का नुकसान हो सकता है. पूरे सीजन में यह नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 सितंबर को मुख्यमंत्री के सामने रखी गई कृषि और सहकारिता विभागों की रिपोर्ट में आगामी सीजन के लिए करीब 9.9 करोड़ मीट्रिक टन गन्ना उपलब्ध होने का अनुमान है. एथेनॉल उत्पादन के लिए 15 लाख मीट्रिक टन गन्ना देने के बाद भी करीब 96.4 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है.
हालांकि, राजू शेट्टी ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जल्दी पेराई के फैसले से महाराष्ट्र के कुल चीनी उत्पादन में करीब 18 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है. उनका कहना है कि इससे मिलों की आय घटेगी और किसानों को भुगतान करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. चीनी उद्योग से जुड़े नेताओं और मिल मालिकों से मुलाकात कर 15 अक्टूबर से पेराई शुरू नहीं करने की अपील की है. वहीं, फेडरेशन ने राज्य सरकार से 1 नवंबर से पेराई शुरू करने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र की त्योहारी सीजन से पहले चीनी उपलब्ध कराने की जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार अपने फैसले पर कायम है.