एग्रीवेट: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की जल्द वापसी और कई इलाकों में सूखे की स्थिति के बीच कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन की तैयारियों को लेकर दो दिन की बैठक बुलाई है. बैठक में रबी फसलों के उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समस्याओं पर चर्चा होगी. देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी और मजबूत होते अल नीनो के कारण खेती और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है. इसका असर रबी फसलों की बुवाई और उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
आईआईटी गांधीनगर के इंडिया ड्राउट मॉनिटर के मुताबिक, 16 सितंबर तक देश के करीब 52.5 फीसदी क्षेत्र में सूखे या कम बारिश की स्थिति थी. करीब एक महीने पहले यह आंकड़ा 38.9 फीसदी था. पश्चिमी और दक्षिणी भारत में स्थिति ज्यादा चिंताजनक बताई गई है. पश्चिमी भारत के करीब 79 फीसदी क्षेत्र, जबकि दक्षिणी भारत के करीब 67 फीसदी क्षेत्र को सूखा या कम बारिश से प्रभावित माना गया है.
भारत में कमजोर मॉनसून के बीच मौसम से जुड़ी निजी एजेंसी स्काईमेट ने अपने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अनुमान को घटाकर LPA के 85 फीसदी कर दिया है. एजेंसी ने देश में सूखे की स्थिति बनने की संभावना 70 फीसदी बताई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 1 जून से 22 सितंबर के बीच देश में 706.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 832.4 मिमी बारिश होती है. इस तरह बारिश में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई.
IMD के अनुसार, देश के करीब 41 फीसदी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश हुई है. मेघालय, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गोवा, कर्नाटक, केरल, असम, तमिलनाडु, हरियाणा और तेलंगाना समेत कई राज्यों में बारिश की कमी रही है. बारिश की इस कमी का असर अब खेती पर भी दिखने लगा है. इससे रबी सीजन की फसलों की बुवाई और उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है.
भारत इस साल करीब दो दशक के सबसे कमजोर मॉनसून की ओर बढ़ रहा है. पूरे मॉनसून सीजन में बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम रहने का अनुमान है. कमजोर मॉनसून और अल नीनो की स्थिति ने सूखे को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुरुआत में 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में बारिश का अनुमान LPA के 92 फीसदी लगाया था। बाद में इसे घटाकर 90 फीसदी कर दिया गया. दोनों अनुमान सामान्य से कम बारिश की ओर इशारा करते हैं.