एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश के 32 जिलों में बीते 3 दिन से हो रही बारिश ने भारी तबाही मचाई है. अलग-अलग मौसम जनित घटनाओं में 16 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. अवध और पूर्वांचल क्षेत्र के जिलों में सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंचा है. कई हिस्सों में पेड़ों के गिरने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. गंगा, सरयू, गोमती समेत अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से खेतों और गांवों में पानी पहुंच गया है. इससे धान, अरहर समेत अन्य खरीफ फसलें चौपट हो गई हैं.
बलरामपुर जिले में पिछले तीन दिनों में बहुत अधिक बारिश और तेज आंधी ने भारी नुकसान किया है और पिछले 24 घंटे के भीतर मां-बेटे सहित नौ लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारियों ने बताया कि जिले में हजारों की संख्या में पेड़ टूट कर गिर गए हैं. वहीं, खेतों में खड़ी गन्ने और धान की फसल गिर गई है. किसानों के मुताबिक गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं, धान की अगेती फसल पर भी असर पड़ने की आशंका है. दलहन और तिलहन की फसलों को भी बारिश से नुकसान होने का डर किसानों को सता रहा है. खराब मौसम को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आकाशीय बिजली और भारी बारिश से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक किया है.
बहराइच जिले में लगातार हो रही बारिश और आंधी-तूफान के कारण अलग-अलग तहसीलों में तीन लोगों की मौत हो गई. नेपाल एवं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों और जिले में हो रही भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात का खतरा बढ़ गया है.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में शनिवार को तेज हवा और भारी बारिश के कारण अलग-अलग स्थानों पर पेड़ गिरने से चार लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य लोग घायल हो गए. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिले के कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के गजरहिया टोला में शाम करीब चार बजे एक पेड़ झोपड़ी पर गिर गया. अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में सुभाष (55), महानंद की पत्नी ज्ञानमती देवी (45) और किशन प्रजापति (13) की मौत हो गई जबकि राममिलन व सिरजावती नाम की महिला गंभीर रूप से घायल हो गए.
बाराबंकी में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. तेज बारिश और हवा के कारण कई खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर बिछ गई है. वहीं, खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है. हरख क्षेत्र के रसूलपुर गांव में खेतों की तस्वीरों में जलभराव और गिरी हुई धान की फसल दिखाई दे रही है. किसानों के मुताबिक धान की फसल लगभग तैयार थी और जल्द ही कटाई शुरू होने वाली थी, लेकिन बारिश ने उनकी मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया. किसानों ने भी केसीसी के जरिए कर्ज लेकर खेती की है. ऐसे में फसल खराब होने की आशंका से किसानों के सामने आर्थिक नुकसान और कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ गई है.