अंडमान में खरीफ 2026 फील्ड डे, उन्नत धान किस्मों और बीज उत्पादन तकनीकों का किया प्रदर्शन, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 26 सितंबर 2026, नई दिल्ली: अंडमान में खरीफ 2026 फील्ड डे, उन्नत धान किस्मों और बीज उत्पादन तकनीकों का किया प्रदर्शन – अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत फसल किस्मों, बीज उत्पादन गतिविधियों और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIARI), श्री विजय पुरम की ओर से खरीफ 2026 क्षेत्र दिवस का आयोजन ब्लूम्सडेल रिसर्च फार्म, चौलदारी में किया गया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों और अन्य हितधारकों को संस्थान की ओर से विकसित और प्रदर्शित की जा रही विभिन्न उन्नत कृषि तकनीकों, फसल किस्मों और बीज उत्पादन गतिविधियों की जानकारी दी गई। इस दौरान खरीफ मौसम में क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल फसल उत्पादन को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए किए जा रहे अनुसंधान कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया।

क्षेत्र दिवस के दौरान धान की उन्नत किस्मों और उनके उत्पादन से जुड़ी तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। संस्थान की ओर से धान के जर्मप्लाज्म के संरक्षण और विभिन्न उन्नत किस्मों पर किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी साझा की गई। संस्थान में 200 से अधिक धान जर्मप्लाज्म के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम में बीज उत्पादन गतिविधियों और फसल प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। किसानों को उन्नत बीजों के उपयोग, बेहतर फसल प्रबंधन और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त कृषि तकनीकों को अपनाने की जानकारी दी गई।

क्षेत्र दिवस के दौरान प्राकृतिक खेती सहित विभिन्न कृषि पद्धतियों पर भी जानकारी साझा की गई। धान-सह-मछली पालन जैसी एकीकृत कृषि प्रणालियों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए किसानों की उत्पादकता और कृषि प्रणाली की स्थिरता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित की जा रही कृषि तकनीकों और अनुसंधान कार्यों की जानकारी साझा की। खरीफ मौसम में फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।

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