कृषि भूमि को आवासीय बनाने का खर्च हुआ आधा, नियमों में बदलाव कर शुल्क घटाकर 25 फीसदी किया—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में कृषि जमीन को आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में बदलना अब पहले के मुकाबले सस्ता होगा. राज्य सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों में कटौती की है. कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने का शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है. नए नियमों के तहत विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्गमीटर तक भू-उपयोग बदलने का अधिकार भी दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) तृतीय संशोधन नियमावली-2026 के तहत कई श्रेणियों में शुल्क कम किया गया है. कृषि, पार्क, खुले स्थान और ग्रीन बेल्ट से सार्वजनिक सुविधा, यातायात और परिवहन के लिए भू-उपयोग बदलने का शुल्क 20 से घटाकर 15 फीसदी किया गया है. कृषि भूमि को लघु  और वृहद उद्योग के लिए बदलने पर 15 फीसदी शुल्क लगेगा. वहीं आवासीय उपयोग के लिए शुल्क 50 से 25 फीसदी, कार्यालय के लिए 100 से 50 फीसदी, मिश्रित उपयोग के लिए 125 से 65 फीसदी और व्यावसायिक उपयोग के लिए 150 से 75 फीसदी कर दिया गया है. शुल्क सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित होगा.

आवासीय भूमि को सार्वजनिक सुविधा, यातायात और पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने पर अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं देना होगा. आवासीय जमीन को लघु और वृहद उद्योग के लिए बदलने पर भी शुल्क नहीं लगेगा. हालांकि, कार्यालय उपयोग के लिए 25 फीसदी और मिश्रित व व्यावसायिक उपयोग के लिए 50-50 फीसदी शुल्क देना होगा. भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क जमीन के क्षेत्रफल और सर्किल रेट के आधार पर तय होगा. योजना या सेक्टर का सर्किल रेट उपलब्ध नहीं होने पर नजदीकी योजना  की दर ली जाएगी. कृषि या वाणिज्यिक दर उपलब्ध न होने पर अकृषिक भूमि की दर आधार बनेगी. कृषि भूमि का सर्किल रेट न होने पर आवासीय दर की 20 फीसदी दर मानी जाएगी. आवेदन शुल्क 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर होगा.

बड़े भूखंडों के लिए शुल्क की गणना टेलिस्कोपिक तरीके से होगी. यानी पूरे क्षेत्रफल पर एक समान दर लागू नहीं होगी, बल्कि निर्धारित क्षेत्रफल श्रेणियों के अनुसार शुल्क की गणना की जाएगी. सर्किल रेट और लागू प्रतिशत इसके आधार होंगे. विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्गमीटर तक भू-उपयोग बदलने का अधिकार दिया गया है. हालांकि, मास्टर प्लान में किसी खास भू-उपयोग को कुल क्षेत्रफल के एक फीसदी तक ही बदला जा सकेगा. इससे अधिक क्षेत्र में बदलाव का अधिकार शासन के पास  रहेगा.

भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदन की प्रति मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को भी दी जाएगी. विकास प्राधिकरण और नगर एवं ग्राम नियोजक विभाग आवेदन की संयुक्त समीक्षा कर 22 दिनों में संस्तुति देंगे. जरूरत पड़ने पर 60 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा या दिया जा सकेगा.

मंजूरी के बाद प्राधिकरण की वेबसाइट  और कम से कम एक समाचार पत्र में जानकारी प्रकाशित कर 15 दिनों में आपत्तियां मांगी जाएंगी. आपत्ति नहीं होने पर प्रस्ताव 15 दिनों में विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भेजा जाएगा. शुल्क की जानकारी मिलने के बाद 90 दिनों में भुगतान करना होगा और भुगतान के 15 दिनों के भीतर भू-उपयोग परिवर्तन की सूचना जारी होगी. हालांकि, हरित क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, वन, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं, सीवेज, STP, जल संयंत्र, ठोस कचरा प्रबंधन, श्मशान, कब्रिस्तान, सड़क, रेलवे, पार्किंग, जल निकासी और तालाब जैसी जमीनों का भू-उपयोग नहीं बदला जा सकेगा.

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