एग्रीवेट: 26 सितंबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ में हल्दी की खेती पर मिल रही सीधी सब्सिडी, अब तक 1.38 करोड़ रुपये किसानों के खाते में – छत्तीसगढ़ में हल्दी की खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार सीधे बैंक खाते में सब्सिडी भेज रही है। उद्यानिकी एवं वन औषधि विभाग की मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में हल्दी की खेती बढ़ाने के लिए 6.2 करोड़ रुपये यानी 620 लाख रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें से 1.38 करोड़ रुपये यानी 138 लाख रुपये पात्र किसानों के खातों में सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए भेजे जा चुके हैं।
योजना का लक्ष्य इस सीजन में राज्य में 1,300 हेक्टेयर रकबे में हल्दी की खेती का विस्तार करना है। यह योजना उन किसानों के लिए फायदेमंद है जो धान जैसी परंपरागत फसल से हटकर मसाला फसलों की ओर रुख करना चाहते हैं और अपनी जमीन के एक हिस्से में नकदी फसल के तौर पर हल्दी लगाना चाहते हैं।
योजना के तहत सरकार किसानों को हल्दी का बीज सीधे उपलब्ध नहीं कराती। किसानों को खुद बाजार से गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज खरीदना होता है और उसका पक्का बिल संभालकर रखना होता है, क्योंकि सब्सिडी की गणना इसी खरीद के आधार पर की जाती है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज उद्यानिकी विभाग के स्थानीय कार्यालय में जमा करने होते हैं।
दस्तावेजों की जांच और खेत में फसल के भौतिक सत्यापन के बाद ही सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाती है। यानी सब्सिडी पाने के लिए किसान को पहले अपनी जेब से बीज पर खर्च करना होता है, और बाद में सरकार उसका एक हिस्सा वापस करती है। रिपोर्टों के मुताबिक फिलहाल इस योजना के लिए कोई अलग ऑनलाइन आवेदन पोर्टल या तय अंतिम तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है, और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान डीबीटी के जरिए भुगतान लगातार जारी है, यानी किसान अभी भी आवेदन कर सकते हैं।
यह योजना छत्तीसगढ़ सरकार की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत राज्य के किसानों को धान पर निर्भरता घटाकर मसाला, बागवानी और अन्य नकदी फसलों की तरफ मोड़ा जा रहा है। हल्दी जैसी फसलों में प्रति हेक्टेयर आमदनी आमतौर पर धान से ज्यादा मानी जाती है, हालांकि इसमें शुरुआती लागत भी अधिक लगती है, जिसकी भरपाई में यह सब्सिडी किसानों की मदद करती है।
हल्दी एक ऐसी मसाला फसल है जिसकी मांग घरेलू रसोई से लेकर दवा और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग तक में लगातार बनी रहती है, जिससे इसकी बिक्री के लिए बाजार आसानी से मिल जाता है। धान की तुलना में हल्दी की फसल को कम पानी में भी संभाला जा सकता है, हालांकि इसे तैयार होने में करीब 8 से 9 महीने का समय लगता है।
चूंकि सब्सिडी सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है, इसलिए इसमें बिचौलियों की भूमिका नहीं रहती और पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है। यह तरीका राज्य सरकार की कई अन्य कृषि सब्सिडी योजनाओं में भी अपनाया जा रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ समय पर और पूरी राशि में किसानों तक पहुंच सके।
जिन किसानों को इस योजना का लाभ लेना है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे बीज खरीदने से पहले एक बार अपने नजदीकी उद्यानिकी विभाग कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर पात्रता की शर्तें और जरूरी दस्तावेजों की पूरी सूची जरूर समझ लें। बिल संभालकर रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बिना पक्के बिल के सब्सिडी का दावा खारिज हो सकता है।